हिन्दू ग्रंथ और परंपराएँ
मध्यवर्तीकर्मयोग: आसक्ति छोड़कर जिम्मेदारी से कर्म करना
परिणाम अनिश्चित हो तो काम आध्यात्मिक साधना कैसे बनता है? भगवद्गीता कर्तव्य, समर्पण, दूसरों की चिंता और कर्म करने वाले के स्वभाव से उत्तर विकसित करती है।
सीखने का लक्ष्य: यज्ञ और लोकसंग्रह समझाएँ, अनासक्ति को लापरवाही से अलग करें और साधारण जिम्मेदारी में गीता के कर्म तथा कर्ता संबंधी विचार लागू करें।
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