मुख्य विचार
चट्टानें शीतलन, अपक्षय, निक्षेपण, दबने, विकृति और पिघलने से बदलती हैं। सापेक्ष काल-निर्धारण घटनाओं का क्रम और संख्यात्मक काल-निर्धारण विशेष घटनाओं की उम्र बताता है। शैल चक्र के अनेक मार्ग हैं, कोई अनिवार्य आरंभ नहीं।
1. खनिज घटक हैं, चट्टानें उनके समूह
खनिज का विशिष्ट संघटन और व्यवस्थित आंतरिक ढाँचा होता है, यद्यपि संघटन निश्चित सीमाओं में बदल सकता है। चट्टान खनिजों या अन्य भूवैज्ञानिक पदार्थ का समूह है। ग्रेनाइट में कई खनिज होते हैं; कुछ चट्टानों में एक प्रधान होता है। दानों का आकार, गठन और संबंध निर्माण के संकेत हैं। रंग केवल एक अवलोकन है: अपक्षय सतह रंग सकता है और अलग खनिजों का रंग समान हो सकता है।
उत्पत्ति से वर्गीकरण पूछता है कि चट्टान कैसे बनी, यह नहीं कि वह सुंदर या उपयोगी है। एक भवन में ग्रेनाइट की पट्टी, बलुआ पत्थर और संगमरमर हो सकते हैं। व्यापारिक नाम वास्तविक नमूने के प्रमाण का विकल्प नहीं। फोटो तुलना में सहायक है, पर निश्चित पहचान के लिए खनिज परीक्षण और भूवैज्ञानिक संदर्भ चाहिए हो सकते हैं।
2. वृत्त रटने के बजाय प्रक्रियाएँ समझें
पिघला पदार्थ ठंडा और ठोस होने पर आग्नेय चट्टान बनती है। धीमे शीतलन में सामान्यतः बड़े क्रिस्टल, तेज शीतलन में महीन गठन बनता है। अपक्षय खुली चट्टान तोड़ता या रासायनिक रूप बदलता है। अपरदन पदार्थ हटाता, परिवहन ले जाता और निक्षेपण नई जगह छोड़ता है। दबना, संपीडन और खनिज सीमेंट ढीले अवसाद को अवसादी चट्टान बना सकते हैं। कुछ अवसादी चट्टानें रासायनिक अवक्षेपण या जैविक संचय से बनती हैं।
ऊष्मा, दाब और सक्रिय द्रव मौजूदा चट्टान को मुख्यतः ठोस रहते हुए कायांतरित कर सकते हैं। पुनःक्रिस्टलीकरण से चूना पत्थर संगमरमर और बलुआ पत्थर क्वार्टजाइट बन सकता है। पदार्थ पिघलकर फिर क्रिस्टल बनाए तो परिणाम आग्नेय होगा। हर खुली चट्टान अपक्षयित और उपयुक्त दबा पदार्थ कायांतरित हो सकता है। कई शाखाएँ बनाएँ: हर चट्टान को निश्चित क्रम में तीनों श्रेणियों से गुजरना जरूरी नहीं।
स्रोत: एनआईओएस: पृथ्वी का आंतरिक भाग, चट्टानें और मिट्टी ↗ · एनसीईआरटी: भू-आकृतिक प्रक्रियाएँ और मृदा निर्माण ↗
3. संख्या देने से पहले क्रम तय करें
अविक्षुब्ध अवसादी क्रम में नीचे की परत ऊपर से पहले जमी थी। अध्यारोपण नियम लगाते समय जाँचें कि परतें उलटी या भ्रंशित तो नहीं। कोई संरचना जिसे काटती है उससे नई होती है: मैग्मा पहले से मौजूद चट्टान में घुसता है और भ्रंश पहले से मौजूद पदार्थ को खिसकाता है। नई चट्टान के टुकड़ों में और पुराना इतिहास हो सकता है।
असंगति अपरदन या निक्षेपण न होने से संरक्षित रिकॉर्ड में अंतराल है। वह शून्य अवधि की अदृश्य परत नहीं। अधूरे पन्नों वाली कॉपी शेष पन्नों का क्रम बता सकती है, बीच की हर घटना नहीं। इसी तरह मोटाई सार्वभौमिक घड़ी नहीं: पतली परत लंबा समय और मोटा निक्षेप अपेक्षाकृत कम समय दर्शा सकता है।
स्रोत: यूएसजीएस: चट्टानों का काल निर्धारण ↗ · एनआईओएस: पृथ्वी का आंतरिक भाग, चट्टानें और मिट्टी ↗ · यूएसजीएस: भूवैज्ञानिक समय और सापेक्ष काल-निर्धारण ↗
4. हल उदाहरण: चट्टानी काट का घटनाक्रम
कागजी चित्र में नीचे से ऊपर अवसादी परतें A, B, C हों। आग्नेय डाइक D तीनों को काटती है। फिर अपरदन C और D दोनों काट देता है और क्षैतिज परत E ऊपर जमती है। मूल परतें उलटी न हों तो क्रम A, B, C, D का अंतर्वेधन, अपरदन, फिर E का निक्षेपण है। D, C से नई और E से पुरानी होगी।
मानें उपयुक्त खनिजों से D का क्रिस्टलीकरण 8 करोड़ वर्ष पहले और E की ज्वालामुखीय राख का 6 करोड़ वर्ष पहले पता चले। बीच की अपरदित सतह इन घटनाओं के बीच बनी, पर उसकी सटीक तिथि अज्ञात है। संख्याएँ काल्पनिक हैं। A में पुराने स्रोत से आए दाने की उम्र उस दाने का पूर्व निर्माण बताएगी, A का निक्षेपण स्वतः नहीं।
काटने वाले संबंधों से क्रम पढ़ें
A → B → C → D → अपरदन → E
स्रोत: यूएसजीएस: चट्टानों का काल निर्धारण ↗ · एनआईओएस: पृथ्वी का आंतरिक भाग, चट्टानें और मिट्टी ↗ · यूएसजीएस: भूवैज्ञानिक समय और सापेक्ष काल-निर्धारण ↗
5. हल उदाहरण: रेडियोधर्मी घड़ी की मान्यताएँ
अस्थिर मूल समस्थानिक सांख्यिकीय रूप से पूर्वानुमेय दर से संतति पदार्थ में बदलता है। अर्धायु वह समय है जिसमें बड़ी संख्या के आधे मूल परमाणु क्षय करते हैं। किसी विशेष परमाणु के बदलने का समय तय नहीं होता। काल्पनिक समस्थानिक की अर्धायु एक करोड़ वर्ष हो और बंद नमूने में शुरू में 800 मूल इकाइयाँ हों, तो एक अर्धायु बाद 400, दो बाद 200 और तीन बाद 100 बचेंगी।
इस आदर्श मॉडल में शेष अंश 100/800 = 1/8 का अर्थ तीन करोड़ वर्ष है। वैज्ञानिक प्रारंभिक संतति पदार्थ, संदूषण, मापन अनिश्चितता और गर्म होने से परमाणुओं के आने-जाने पर विचार करते हैं। अलग खनिजों की घड़ियाँ अलग दशाओं में बंद होती हैं। अत्यंत पुरानी चट्टानों के लिए कार्बन काल-निर्धारण सामान्य विधि नहीं; समस्थानिक को पदार्थ, घटना और समयमान से मेल खाना चाहिए।
स्रोत: यूएसजीएस: चट्टानों का काल निर्धारण ↗ · यूएसजीएस: रेडियोमितीय काल मापनी ↗ · यूएसजीएस: सैनिडीन में शीतलन और उद्गार का रिकॉर्ड ↗
6. भारतीय भू-दृश्य को घटनाक्रम की तरह पढ़ें
दक्कन का बेसाल्ट भू-दृश्य लावा फैलने और बाद के लंबे अपक्षय, नदी कटाव तथा अपरदन का रिकॉर्ड है। बेसाल्ट काटती वर्तमान नदी उस चट्टान से नई है, भले पानी के अणु नए न बने हों। उत्तरी मैदान का अवसाद नवीन निक्षेप से बहुत पुराने खनिज दाने रख सकता है। दाने, चट्टान निर्माण और स्थलरूप की उम्र अलग पहचानें।
भूवैज्ञानिक मानचित्र स्थान के अनुसार अवलोकन समूहित करते हैं; काट-चित्र मानचित्र की रेखा के नीचे संबंध दिखाते हैं। दोनों में संकेत सूची और पैमाना पढ़ें। सीमित प्रमाण से कई इतिहास संभव हों तो भूवैज्ञानिक उन्हें अलग करने वाला संबंध खोजते हैं। अच्छी पुनर्रचना समर्थित क्रम और अनुपलब्ध सूचना दोनों बताती है; हर अंतराल में सटीक दिखती संख्या नहीं भरती।
स्रोत: एनसीईआरटी: पृथ्वी का आंतरिक भाग ↗ · एनसीईआरटी: भू-आकृतिक प्रक्रियाएँ और मृदा निर्माण ↗ · यूएसजीएस: चट्टानों का काल निर्धारण ↗
अभ्यास करें
अभ्यास: तर्क, गणना और जाँच
- तीन क्षैतिज परतें और केवल नीचे की दो को काटती डाइक बनाएँ; ऊपर की परत डाइक के अपरदित सिरे पर रखें।
- क्रम लिखें और उलटी परतों के बारे में मान्यता बताएँ।
- काल्पनिक 50 लाख वर्ष की अर्धायु पर 1,600 मूल इकाइयों से 200 बचने का समय निकालें।
- जाँच: परतें उलटी न मानें तो निचली परतें, डाइक, अपरदन, फिर ऊपरी परत। तीन अर्धायु से डेढ़ करोड़ वर्ष। पुराने स्रोत से आए दाने की घड़ी बाद के अवसाद में आने से पहले का क्रिस्टलीकरण बता सकती है।
अपनी समझ जाँचें
क्या कायांतरण में पूरा पिघलना चाहिए?
नहीं। कायांतरण मुख्यतः ठोस अवस्था में होता है; पिघले पदार्थ का क्रिस्टलीकरण आग्नेय चट्टान बनाता है।
बलुआ पत्थर के दानों की उम्र निक्षेपण से अधिक क्यों हो सकती है?
दाने पुरानी चट्टानों में बने, फिर अपरदित, परिवहित और दोबारा जमा हुए हो सकते हैं।
क्या मोटी परत हमेशा अधिक समय बताती है?
नहीं। निक्षेपण दरें अलग होती हैं और अपरदन रिकॉर्ड हटाता है। अकेली मोटाई पर्याप्त नहीं।
संख्यात्मक उम्र के बिना डाइक उदाहरण क्या बताता है?
निक्षेपण, अंतर्वेधन और अपरदन का सापेक्ष क्रम, यदि काटने के देखे संबंध सही हों।
क्या अर्धायु में नमूने का आधा द्रव्यमान गायब होता है?
नहीं। आधे मूल परमाणु संतति उत्पाद बनते हैं; पूरे नमूने का द्रव्यमान बस आधा नहीं होता।
भूवैज्ञानिक उम्र की अनिश्चितता क्यों बताएँ?
माप और मॉडल की सीमाएँ होती हैं। उम्र का अंतराल अनुचित अतिरिक्त अंकों से अधिक सही प्रमाण दर्शाता है।
