मुख्य विचार
पदार्थ में द्रव्यमान होता है और वह स्थान घेरता है। उसके कण गतिशील हैं और परस्पर क्रिया करते हैं; व्यवस्था, दूरी और ऊर्जा बदलने से पदार्थ की पहचान बदले बिना अवस्था बदल सकती है।

1. जाँचे जा सकने वाले मॉडल से शुरुआत
पत्थर, चम्मच भर पानी और गेंद के भीतर की हवा सभी पदार्थ हैं। द्रव्यमान पदार्थ की मात्रा और आयतन घेरे हुए स्थान को दर्शाता है। द्रव्यमान की इकाइयाँ ग्राम या किलोग्राम हैं; आयतन की मिलीलीटर या घन मीटर। मॉडल में दिखने वाले नमूने में असंख्य सूक्ष्म कण होते हैं—पदार्थ के अनुसार परमाणु, अणु या आयन। चित्र के गोले प्रतीक हैं, तस्वीरें नहीं। कणों के बीच दूरी और बल प्रत्यक्ष व्यवहार समझाते हैं, पर केवल चित्र से कणों की पहचान सिद्ध नहीं होती।
स्रोत: आईआईटी कानपुर साथी पर एनसीईआरटी: हमारे आसपास के पदार्थ ↗ · एनआईओएस: हमारे आसपास के पदार्थ ↗
2. व्यवस्था से आकार और संपीडन समझें
ठोस में कण लगभग निश्चित स्थानों के आसपास कंपन करते हैं। द्रव में पास-पास के कण स्थान बदल सकते हैं, इसलिए द्रव बहता है और पात्र के भरे हिस्से का आकार लेता है। गैस के कण दूर-दूर होते हैं और पूरे पात्र में चलते हैं। गैस दबाने से मुख्यतः कणों की दूरियाँ घटती हैं; हर अणु छोटा नहीं हो जाता। ठोस और द्रव को दबाना कठिन है। रेत उड़ेली जा सकती है, पर हर दाना ठोस है: दानों की व्यवस्था बदलना उनके पदार्थ को पिघलाना नहीं है।
एक कण मॉडल, तीन अवस्थाएँ
| अवस्था | कणों की व्यवस्था और गति | बड़े स्तर पर परिणाम |
|---|---|---|
| ठोस | पास-पास; अपनी स्थिति के आसपास कंपन | निश्चित आकार और आयतन |
| द्रव | पास-पास; एक-दूसरे के सापेक्ष स्थान बदलते हैं | निश्चित आयतन; पात्र का आकार लेते हैं |
| गैस | अपने आकार की तुलना में दूर-दूर; स्वतंत्र गति | उपलब्ध स्थान में फैलती है |
स्रोत: आईआईटी कानपुर साथी पर एनसीईआरटी: हमारे आसपास के पदार्थ ↗
3. अनियमित गति से भी पैटर्न बनता है
द्रव और गैस के कण अनेक दिशाओं में चलते हैं। किसी प्रकार के अधिक कण एक क्षेत्र में हों तो अनियमित गति का कुल परिणाम प्रायः कम सांद्रता वाले क्षेत्र की ओर फैलाव होता है; यह विसरण है। कण लक्ष्य नहीं जानते और समान वितरण के बाद भी चलते रहते हैं। कमरे में गंध फैलने में विसरण के साथ हवा का बहाव भी शामिल हो सकता है। तापमान बढ़ने पर कणों की गति सामान्यतः बढ़ती है, पर वायु प्रवाह भी गंध पहुँचने का समय बदलता है। निष्पक्ष तुलना में दूसरे प्रभाव समान रखने होंगे।
स्रोत: आईआईटी कानपुर साथी पर एनसीईआरटी: हमारे आसपास के पदार्थ ↗
4. अवस्था परिवर्तन में ऊर्जा का पुनर्वितरण
गलन ठोस को द्रव और जमना द्रव को ठोस बनाता है। वाष्पन द्रव से गैस तथा संघनन गैस से द्रव का परिवर्तन है। ऊर्ध्वपातन सीधे ठोस से गैस और निक्षेपण उसका उलटा है। ये दिशा बताते हैं, नया पदार्थ नहीं। बर्फ पिघलने पर जल के अणु जल ही रहते हैं। एक अवस्था में गर्म करने से गति सामान्यतः बढ़ती है। निश्चित दाब पर शुद्ध पदार्थ के अवस्था परिवर्तन में ऊर्जा कणों के संबंध बदल सकती है जबकि तापमान लगभग स्थिर रहता है। इसलिए तापमान कुल ऊर्जा का माप नहीं। गलनांक और क्वथनांक दाब तथा उपस्थित पदार्थों पर भी निर्भर हैं।
स्रोत: आईआईटी कानपुर साथी पर एनसीईआरटी: हमारे आसपास के पदार्थ ↗
5. सूखने के लिए उबलना जरूरी नहीं
वाष्पीकरण में सतह के कुछ कण गैसीय अवस्था में निकलते हैं। उबलने में क्वथन की दशा पर पूरे द्रव में वाष्प के बुलबुले बनते हैं। गीला कपड़ा क्वथनांक से नीचे भी वाष्पीकरण के कारण सूखता है। अधिक खुली सतह से निकलने के अवसर बढ़ते हैं; चलती हवा पास की नम हवा हटाती है। बाकी दशाएँ समान हों तो अधिक आर्द्रता सूखना घटाती है। निकलते कण ऊर्जा ले जाते हैं, इसलिए द्रव और परिवेश ठंडे हो सकते हैं। जलवाष्प अदृश्य है; धुंध छोटी द्रव बूँदें हैं। बंद ठंडी बोतल के बाहर का पानी आसपास की हवा से आता है।
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6. हल उदाहरण: गायब दिखते पानी का हिसाब
उदाहरणार्थ काल्पनिक आँकड़े: खाली तश्तरी 40 g, पानी सहित शुरू में 160 g और बाद में 145 g है। प्रारंभिक पानी 160 − 40 = 120 g और बचा पानी 145 − 40 = 105 g है। छलकाव या अन्य बदलाव न हो तो 15 g पानी बाहर गया। तश्तरी खुला तंत्र है क्योंकि पदार्थ उसकी सीमा पार कर सकता है। पानी समाप्त नहीं हुआ, वाष्प बनकर हवा में गया। उस हवा सहित पूरा बंद परिसर तौला जाए तो मापन की अनिश्चितता के भीतर कुल द्रव्यमान समान रहेगा।
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7. हल उदाहरण: स्थिर तापमान का अर्थ
उदाहरणार्थ शुद्ध बर्फ का सामान्य वायुमंडलीय दाब पर काल्पनिक रिकॉर्ड लें: ऊर्जा मिलते हुए तापमान गलन पूरा होने तक लगभग 0 °C रहता है, फिर 4 °C होता है। सपाट भाग ऊर्जा हस्तांतरण रुकना नहीं बताता; ऊर्जा व्यवस्था और परस्पर संबंध बदलने में लगी। सेल्सियस का चिह्न °C और केल्विन का K है, K पर डिग्री चिह्न नहीं। T(K) = t(°C) + 273.15 से 4 °C = 277.15 K। T और t अलग पैमानों पर वही तापमान हैं। 0 से 4 °C की वृद्धि 4 केल्विन है, 277.15 केल्विन नहीं।
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अभ्यास करें
अपनी समझ लागू करें
- ठोस, द्रव और गैस में समान संख्या के जल-कण बनाएँ। कणों का आकार समान रखकर दूरी और गति की स्वतंत्रता बदलें।
- काल्पनिक रिकॉर्ड में पानी सहित तश्तरी 210 g से 198 g होती है। अंतर निकालें और इसे वाष्पीकरण कहने के लिए दो धारणाएँ लिखें।
- जाँचें: 12 g निकला। पानी न छलकना और अन्य पदार्थ न निकलना जरूरी धारणाएँ हैं। पदार्थ कहाँ गया और चित्र से दर क्यों तय नहीं होती, समझाएँ।
अपनी समझ जाँचें
फूली गेंद हवा के स्थान घेरने का प्रमाण कैसे है?
हवा लचीली दीवार पर बाहर की ओर बल डालती है और भीतर भरती है। अदृश्य होने का अर्थ अनुपस्थित होना नहीं; दीवार पर प्रभाव दिखता है।
गतिशील कणों वाला ठोस बहता क्यों नहीं?
कण सीमित स्थानों के आसपास कंपन करते हैं। बहने के लिए पड़ोसी कणों का लगातार पुनर्विन्यास चाहिए, जिसे सामान्य ठोस संरचना रोकती है। गति और मुक्त स्थानांतरण अलग हैं।
पोखर गायब होने से पदार्थ का नष्ट होना सिद्ध है?
नहीं। जमीन के साथ आसपास की हवा भी देखें। देखे जा रहे तंत्र से द्रव जल निकला और दूसरे क्षेत्र को जलवाष्प मिली।
समान तापमान के नमूनों की कुल ऊर्जा अलग क्यों हो सकती है?
पदार्थ की मात्रा या अवस्था अलग हो सकती है। तापमान अकेले द्रव्यमान या कणों के परस्पर संबंध की ऊर्जा नहीं बताता।
बोतल पर संघनन से रिसाव सिद्ध क्यों नहीं होता?
आसपास की हवा में मौजूद जलवाष्प ठंडी बाहरी सतह पर द्रव बन सकती है। रिसाव एक संभावना है, जिसके लिए अलग प्रमाण चाहिए।
