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विज्ञान

धातु, अधातु और सामग्री का चुनाव

बर्तन, उसके हत्थे और विद्युत केबल को अलग गुण चाहिए। किसी एक सामग्री को हर काम में श्रेष्ठ मानने के बजाय रसायन से चुनाव का कारण समझें।

PLS फाउंडेशन द्वारा · · 5 मिनट पढ़ाई, और अभ्यास

इस पाठ के अंत तक: सामग्रियों के गुणों की तुलना करें, उदाहरण में मिश्रधातु का संघटन निकालें और समझाएँ कि संक्षारण से सुरक्षा वातावरण के अनुसार क्यों चाहिए।

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मुख्य विचार

सामग्री तब उपयोगी होती है जब उसके विद्युत, ऊष्मीय, यांत्रिक और रासायनिक गुण काम से मेल खाते हों। तत्व की श्रेणी संकेत देती है; संरचना, मिश्रधातु बनाना और सतह की सुरक्षा व्यवहार बदलते हैं।

1. शुरुआत कई गुणों से करें

कई धातुओं की नई खुली सतह चमकती है, वे विद्युत और ऊष्मा की चालक होती हैं तथा तुरंत टूटे बिना आकार दी जा सकती हैं। आघातवर्धनीयता का अर्थ चादर बन सकना और तन्यता का अर्थ तार खींच सकना है। ये कठोरता से अलग हैं, जो खरोंच या दबाव से गड्ढा पड़ने के प्रतिरोध से जुड़ी है। कोई सामग्री कठोर पर भंगुर, या मुलायम पर आसानी से आकार लेने वाली हो सकती है। सामान्य नियमों के अपवाद हैं: ग्रेफाइट कार्बन का अधातु रूप होते हुए विद्युत चालक है; पारा सामान्य कमरे के तापमान पर द्रव धातु है। पहचान के अभ्यास में इनमें से किसी भी पदार्थ को न छुएँ या संभालें। तत्व और उसके यौगिक में भी अंतर करें: नीले कॉपर सल्फेट क्रिस्टल ताँबा धातु नहीं हैं और उसके सारे गुण नहीं रखते। लकड़ी, काँच और प्लास्टिक अधात्विक सामग्रियाँ हैं, लेकिन अलग-अलग अधातु तत्व नहीं। तत्व की श्रेणी से व्याख्या करने से पहले वास्तविक सामग्री पहचानें।

गहरे धूसर ग्रेफाइट के नमूने पर तिरछी रखी काली यांत्रिक पेंसिल।
ऑकलैंड संग्रहालय के संग्रह से ग्रेफाइट का नमूना, साथ में एक यांत्रिक पेंसिल। · Auckland Museum Collections · CC BY 2.0

स्रोत: एनसीईआरटी: धातु एवं अधातु ↗ · ओपनस्टैक्स, राइस विश्वविद्यालय: पदार्थ की ठोस अवस्था ↗

2. गुणों को भीतरी संरचना से जोड़ें

धात्विक बंध के सरल मॉडल में धनावेशित परमाणवीय भाग ऐसे इलेक्ट्रॉनों से जुड़े रहते हैं जो धातु में चल सकते हैं। ये गतिशील इलेक्ट्रॉन विद्युत चालकता समझाने में मदद करते हैं। परमाणुओं की परतें कई बार खिसक सकती हैं और धात्विक बंध बना रहता है; इससे आकार देना समझ आता है। वास्तविक मज़बूती दोषों, निर्माण प्रक्रिया और संघटन पर भी निर्भर करती है। ग्रेफाइट से तुलना करें: उसके कार्बन परमाणु दृढ़ बंध वाली परतें बनाते हैं और कुछ इलेक्ट्रॉन उन परतों में चल सकते हैं। इसलिए वह “सभी अधातुएँ कुचालक हैं” का उपयोगी अपवाद है। हीरा भी कार्बन है, लेकिन उसका त्रिविमीय बंध-जाल अलग गुण पैदा करता है। केवल तत्व का नाम सामग्री का पूरा विवरण नहीं है। इसी तरह किसी वस्तु का कठोर दिखना उसकी विद्युत चालकता नहीं बताता। संरचनात्मक मॉडल मापे गए गुण को समझाए; आकर्षक चित्र को मापन की जगह न दें।

स्रोत: ओपनस्टैक्स, राइस विश्वविद्यालय: पदार्थ की ठोस अवस्था ↗

3. एक वस्तु में विपरीत गुणों की जरूरत

कागज़ पर बर्तन और उसके हत्थे की रूपरेखा बनाएँ। आधार को ऊष्मा अच्छी तरह पहुँचानी, काम का तापमान सहना और निर्धारित भोजन तथा सफ़ाई की दशाओं के अनुकूल रहना चाहिए। हत्था हाथ तक गर्मी का पहुँचना सीमित करे और मज़बूती से जुड़ा रहे। एक ही वस्तु में चालक आधार और ऊष्मारोधी हत्था अलग जरूरतें पूरी करते हैं। इसी तरह विद्युत केबल में चालक भीतरी तार और उपयुक्त विद्युतरोधी आवरण चाहिए; ताँबा चालक है, इसलिए खुला तार अपने-आप तैयार उपयोगी केबल नहीं बन जाता। चुनाव में केवल पसंदीदा सामग्री नहीं, परिस्थितियों की सूची चाहिए। तापमान, भार, नमी, संपर्क वाले पदार्थ, उपयोग-अवधि, मरम्मत और लागत पर विचार करें। केवल रूप पर्याप्त नहीं। यह रूपरेखा की तुलना है, नमूने गर्म करने, चालू तार जाँचने या उपकरण बदलने का निर्देश नहीं। लेबल, तस्वीरों और दिए गुणों की जानकारी से काम करें।

स्रोत: एनसीईआरटी: धातु एवं अधातु ↗

4. सतह की परत सुरक्षा दे सकती है या विफल हो सकती है

संक्षारण में धातु अपने परिवेश से अभिक्रिया करके बदलती है। जंग लगना विशेष रूप से लोहे से जुड़ा है और सामान्य दशाओं में पानी तथा ऑक्सीजन चाहिए; चाँदी का काला पड़ना और ताँबे की हरी परत अलग संक्षारण उत्पाद हैं। जंग झड़कर नया लोहा खोल सकती है, इसलिए वह भरोसेमंद सुरक्षात्मक आवरण नहीं है। ऐलुमिनियम पर पतली चिपकी ऑक्साइड परत बनती है, जो उपयुक्त दशाओं में आगे का आक्रमण धीमा कर सकती है। लोहे पर रंग की परत सही बनी रहने तक सतह को परिवेश से अलग रखती है। जस्तीकरण में जस्ता चढ़ाते हैं; उपयुक्त विद्युत संपर्क बना हो तो जस्ता पहले संक्षारित होकर खुले लोहे को भी बचा सकता है। दोनों प्रक्रियाएँ अलग हैं: रंग और जस्ते की परत पर खरोंच का तत्काल प्रभाव समान होना जरूरी नहीं। सुरक्षा की सीमा होती है और वातावरण महत्त्वपूर्ण है। पुरानी सतहों को बिना खुरचे, घिसे या रसायन लगाए देखें; क्षतिग्रस्त आवरण को रखरखाव का संकेत मानें।

स्रोत: ओपनस्टैक्स, राइस विश्वविद्यालय: संक्षारण ↗ · एनसीईआरटी: धातु एवं अधातु ↗

5. हल उदाहरण: मिश्रधातु का प्रतिशत समझें

मिश्रधातु में किसी धातु को अन्य तत्वों के साथ मिलाकर उपयोगी गुण पाए जाते हैं। पीतल में ताँबा और जस्ता होते हैं; इस्पात का आधार लोहा है, जिसमें कार्बन और कभी अन्य तत्व होते हैं। मिश्रधातु बनाने से कठोरता, मज़बूती, संक्षारण-प्रतिरोध और चालकता बदल सकती है, पर हर मिश्रधातु हर गुण सुधारती है—ऐसा नियम नहीं। एक उदाहरण में 250 g पीतल के नमूने का द्रव्यमान से संघटन 70% ताँबा और 30% जस्ता दिया है। ताँबा = 0.70 × 250 = 175 g; जस्ता = 0.30 × 250 = 75 g। जाँच: 175 + 75 = 250 g। यह संघटन की गणना है, धातु गलाने की विधि नहीं। इससे पीतल का निश्चित आणविक सूत्र नहीं मिलता। केवल प्रतिशत प्रदर्शन की गारंटी भी नहीं: वास्तविक उत्पाद के चुनाव में निर्माण-प्रक्रिया, सूक्ष्म संरचना और उपयोग की दशाएँ भी महत्त्वपूर्ण हैं।

उदाहरण में 250 g पीतल का नमूना

घटकद्रव्यमान का अंशगणनाद्रव्यमान
ताँबा70%0.70 × 250 g175 g
जस्ता30%0.30 × 250 g75 g
कुल100%175 g + 75 g250 g
मूल गणितीय उदाहरण, निर्माण-विधि नहीं। संघटन का प्रतिशत कठोरता या उपयुक्तता की गारंटी नहीं है।

स्रोत: एनसीईआरटी: धातु एवं अधातु ↗

6. प्रमाण से निकलता हुआ चुनाव करें

मान लें विद्यालय की प्रदर्शनी के लिए छोटा स्टैंड चाहिए, जो भीतर रहे, हल्का भार सँभाले और स्थानीय स्तर पर मरम्मत हो सके। दो काल्पनिक विकल्पों की तुलना करें। A की शुरुआती कीमत ₹400 है और चुनी गई पाँच वर्ष की अवधि में ₹150 की मरम्मत चाहिए। B की कीमत ₹650 है और उसी उदाहरण के रिकॉर्ड में मरम्मत नहीं चाहिए। दर्ज कुल ₹550 और ₹650 हैं। इस उदाहरण में A ₹100 सस्ता है, लेकिन तभी जब दोनों भार और सुरक्षा की जरूरत पूरी करें तथा अनुमानित मरम्मत यथार्थ हो। गणना यह सिद्ध नहीं करती कि अनाम सामग्री अधिक मज़बूत, अधिक टिकाऊ या हर जगह सस्ती है। निर्णय के चार हिस्से लिखें: काम, जरूरी गुण, प्रमाण और बची अनिश्चितता। इससे रसायन निष्पक्ष तुलना से जुड़ता है। उपयुक्त वस्तु को रखरखाव से काम में बनाए रखना उसकी पहली सामग्री चुनने जितना महत्त्वपूर्ण हो सकता है।

अभ्यास करें

अपनी समझ लागू करें

  1. केवल उदाहरण के लिए 400 g मिश्रधातु में द्रव्यमान से 75% ताँबा और 25% जस्ता है। दोनों द्रव्यमान निकालें।
  2. जाँचें: ताँबा = 300 g और जस्ता = 100 g। बताएँ कि अनुपात से मिश्रधातु की ठीक कठोरता क्यों नहीं मिलती।
  3. बर्तन की तस्वीर से आधार का एक जरूरी गुण और हत्थे का एक गुण लिखें। गर्म करने या विद्युत जाँच की जरूरत नहीं।

अपनी समझ जाँचें

क्या कठोरता और आघातवर्धनीयता समान हैं?

नहीं। कठोरता गड्ढे या खरोंच का प्रतिरोध है; आघातवर्धनीयता बिना टूटे चादर बनने की क्षमता है।

ग्रेफाइट उपयोगी प्रतिउदाहरण क्यों है?

यह कार्बन का अधातु रूप है जो विद्युत चलाता है; इसलिए केवल श्रेणी पर्याप्त नहीं।

क्षतिग्रस्त रंग की परत महत्त्वपूर्ण क्यों है?

वह लोहे को पानी और ऑक्सीजन के संपर्क में लाकर जंग बनने दे सकती है।

क्या पीतल का एक निश्चित आणविक सूत्र है?

नहीं। पीतल बदलते संघटन वाली मिश्रधातु है, एक जैसे पीतल-अणुओं से बना पदार्थ नहीं।

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