मुख्य विचार
स्थिर परिपथ में प्रवाह के दौरान आवेश संरक्षित रहता है, जबकि ऊर्जा स्रोत से घटकों और आसपास जाती है। अपरिवर्तित परिस्थितियों में ओमीय प्रतिरोधक के लिए V = IR है; श्रेणी और समांतर संयोजन के नियम अलग हैं।
1. अनुप्रस्थ काट से गुजरता आवेश गिनें
विद्युत आवेश पदार्थ का गुण है, जिसकी इकाई कूलॉम, C है। धारा चुने अनुप्रस्थ काट से गुजरते शुद्ध आवेश की दर है। स्थिर धारा के लिए I = Q/t, जहाँ Q समय t में गुजरा आवेश है। सेकंड और कूलॉम लेने पर धारा ऐम्पियर में है: 1 A = 1 C/s। धातु तार में गतिशील इलेक्ट्रॉन होते हैं; उनका अपवाह धन आवेश की गति वाली परंपरागत धारा दिशा के विपरीत है। प्रतिरोधक गुजरता आवेश खर्च नहीं करता। स्थिर, शाखारहित परिपथ के हर भाग में समान धारा होती है, क्योंकि आवेश लगातार किसी एक स्थान पर जमा नहीं होता। धारा प्रवाह दर है, तार में रखी मात्रा नहीं।
स्रोत: एनसीईआरटी: विद्युत ↗ · ओपनस्टैक्स: धातुओं में चालन का मॉडल ↗
2. प्रति आवेश ऊर्जा का हिसाब रखें
विभवांतर, जिसे वोल्टेज भी कहते हैं, दो बिंदुओं के बीच प्रति इकाई आवेश ऊर्जा हस्तांतरण बताता है। इकाई वोल्ट, V है: 1 V = 1 J/C। स्थिर विभवांतर पर Q आवेश गुजरने से घटक को विद्युत ऊर्जा E मिले तो E = VQ। सेल रासायनिक प्रक्रियाओं से विभवांतर बनाए रखता है; पूरा परिपथ होने पर विद्युत क्षेत्र चालकों में पहले से मौजूद आवेशों को चलाता है। स्विच खोलने से चालक पथ टूटता और स्थिर धारा रुकती है, लेकिन खुले अंतराल पर विभवांतर रह सकता है। वोल्टमीटर दो बिंदुओं की तुलना करता है, जबकि ऐमीटर पथ में प्रवाह मापता है। ये अलग मापन हैं, एक ही विद्युत की अदला-बदली योग्य रीडिंग नहीं।
स्रोत: एनसीईआरटी: विद्युत ↗ · ओपनस्टैक्स: धातुओं में चालन का मॉडल ↗
3. ओम के नियम की शर्त बताएँ
तापमान और अन्य भौतिक परिस्थितियाँ अपरिवर्तित हों तो ओमीय प्रतिरोधक में धारा विभवांतर के समानुपाती है: V = IR। प्रतिरोध R की इकाई ओम, Ω है: 1 Ω = 1 V/A। स्थिर विभवांतर पर अधिक प्रतिरोध का अर्थ कम धारा है। गतिशील आवेश वाहकों और पदार्थ की सूक्ष्म परस्पर क्रियाएँ ऊर्जा को अनियमित गति व अन्य आंतरिक प्रक्रियाओं में पहुँचाती हैं। इससे आवेश खर्च हुए बिना प्रतिरोधी तापन समझ आता है। प्रतिरोध पदार्थ, आयाम और ताप पर निर्भर है। लंबे एकसमान तार का प्रतिरोध सामान्यतः अधिक होता है, जबकि बड़ा अनुप्रस्थ क्षेत्र अधिक चालक पथ देता है। हर घटक का विभवांतर-धारा संबंध सीधी रेखा नहीं होता; स्थिर-R मॉडल की उपयुक्तता जाँचना जरूरी है।
स्रोत: एनसीईआरटी: विद्युत ↗ · ओपनस्टैक्स: धातुओं में चालन का मॉडल ↗
4. गणना से पहले संयोजन पढ़ें
श्रेणी में घटकों का एक शाखारहित पथ होता है, इसलिए स्थिर धारा समान होती है। आदर्श पाश में उनके विभवांतरों का योग स्रोत विभवांतर है और Rtotal = R₁ + R₂। समांतर शाखाएँ समान दो संधियों के बीच जुड़ती हैं, इसलिए उनका विभवांतर समान है; शाखा धाराएँ संधि पर जुड़ती हैं। दो प्रतिरोधकों के लिए 1/Rtotal = 1/R₁ + 1/R₂। संधि का अर्थ आदर्श तार से विद्युत रूप से जुड़े बिंदु हैं। केवल कागज पर दो प्रतीक पास-पास दिखने से वे समांतर नहीं होते। संपर्कों का अनुसरण करें। सैद्धांतिक मीटर चित्र में ऐमीटर मापे जाने वाले पथ में और वोल्टमीटर तुलना वाले दो बिंदुओं के बीच होता है।
स्रोत: एनसीईआरटी: विद्युत ↗
5. ऊर्जा और आवेश का हिसाब अलग रखें
E = VQ और Q = It मिलाने पर स्थिर विभवांतर तथा धारा के लिए E = VIt मिलता है। समय से भाग देने पर विद्युत शक्ति P = VI वाट, W में है; एक वाट एक जूल प्रति सेकंड है। ओमीय प्रतिरोधक में V = IR रखने से P = I²R और E = I²Rt। आदर्श प्रतिरोधक विद्युत ऊर्जा को आंतरिक ऊर्जा में बदलता है, जो अंततः आसपास को गर्म करती है। लैंप प्रकाश और मोटर यांत्रिक निर्गम भी दे सकती है। आवेश परिपथ में लौटता रहे, फिर भी स्रोत को ये ऊर्जा हस्तांतरण देने होंगे। यहाँ के सभी उदाहरण आदर्श स्रोत और नगण्य तार प्रतिरोध वाले कागजी मॉडल हैं; परिपथ बनाने के निर्देश नहीं।
स्रोत: एनसीईआरटी: विद्युत ↗
6. हल उदाहरण: श्रेणी में विभवांतर बँटना
काल्पनिक परिपथ: आदर्श 6 V स्रोत श्रेणी में 4 Ω और 8 Ω प्रतिरोधकों को ऊर्जा देता है। कुल प्रतिरोध 12 Ω, इसलिए पूरे पथ में धारा I = 6/12 = 0.50 A है। पहले पर विभवांतर 0.50 × 4 = 2 V और दूसरे पर 0.50 × 8 = 4 V; योग 6 V है। स्रोत शक्ति 6 × 0.50 = 3 W। 60 s में स्रोत 180 J देता है। प्रतिरोधकों को क्रमशः 60 J और 120 J मिलते हैं, जिनका योग 180 J है। दूसरे को प्रति कूलॉम अधिक ऊर्जा मिलती है, लेकिन दोनों में प्रति सेकंड समान आवेश गुजरता है।
एक श्रेणी पथ: समान धारा, बँटा विभव
| घटक | प्रतिरोध | धारा | विभवांतर |
|---|---|---|---|
| पहला प्रतिरोधक | 4 Ω | 0.50 A | 2 V |
| दूसरा प्रतिरोधक | 8 Ω | 0.50 A | 4 V |
| श्रेणी का कुल | 12 Ω | 0.50 A | 6 V |
स्रोत: एनसीईआरटी: विद्युत ↗
7. हल उदाहरण: संधि पर धारा बँटना
अलग काल्पनिक मॉडल में 6 Ω और 3 Ω प्रतिरोधक आदर्श 6 V स्रोत पर समांतर हैं। दोनों शाखाओं पर 6 V है। धाराएँ 6/6 = 1 A और 6/3 = 2 A हैं। स्रोत धारा 3 A, इसलिए तुल्य प्रतिरोध 6/3 = 2 Ω है, जो दोनों शाखा प्रतिरोधों से कम है। स्रोत शक्ति 6 × 3 = 18 W; शाखा शक्तियाँ 6 W और 12 W हैं। इसलिए स्थिर विभवांतर पर समांतर चालक शाखा जोड़ने से स्रोत धारा बढ़ सकती है। वास्तविक सेल का आंतरिक प्रतिरोध और सीमित निर्गम हो सकता है, इसलिए यह आदर्श अनुमान अधिक भार पर हर बैटरी का व्यवहार नहीं बताता।
स्रोत: एनसीईआरटी: विद्युत ↗
अभ्यास करें
लागू करें और अपना तर्क जाँचें
- कागज पर काल्पनिक आदर्श 3 V स्रोत और 6 Ω प्रतिरोधक का बंद पाश बनाएँ। धारा का अनुमान लगाएँ और 20 s में गुजरता आवेश निकालें।
- शक्ति और हस्तांतरित ऊर्जा निकालें। फिर स्विच खुला बनाएँ और स्थिर धारा के अनुमान तथा अंतराल के विभवांतर में अंतर बताएँ।
- जाँचें: I = 0.50 A, Q = 10 C, P = 1.50 W और E = 30 J। आदर्श स्विच खुला हो तो स्थिर धारा शून्य है; स्रोत फिर भी अंतराल पर 3 V बनाए रख सकता है।
अपनी समझ जाँचें
श्रेणी प्रतिरोधक के बाद धारा कम क्यों नहीं है?
स्थिर प्रवाह में आवेश प्रतिरोधक में लगातार जमा नहीं हो सकता। प्रति सेकंड जितना आवेश आता है उतना निकलता है, जबकि ऊर्जा प्रतिरोधक को मिलती है।
क्या स्थिर धारा के बिना विभवांतर हो सकता है?
हाँ। पूरा चालक पथ न होने पर भी खुले परिपथ में विभवांतर रह सकता है।
स्थिर प्रतिरोध मॉडल में तापमान बताना क्यों जरूरी है?
पदार्थ की परस्पर क्रियाएँ और प्रतिरोध ताप से बदल सकते हैं। पर्याप्त गर्म होता घटक गणना वाला प्रतिरोध बनाए रखे, यह जरूरी नहीं।
समांतर तुल्य प्रतिरोध किसी भी धनात्मक शाखा प्रतिरोध से कम क्यों है?
अतिरिक्त शाखा नया पथ देती है और समान विभवांतर पर कुल धारा बढ़ाती है। इसलिए स्रोत विभवांतर और कुल धारा का अनुपात घटता है।
यदि बैटरी नया आवेश नहीं बनाती तो क्या देती है?
रासायनिक प्रक्रियाएँ ऊर्जा देती और विभवांतर बनाए रखती हैं, जो मौजूद आवेशों को चलाता है। ऊर्जा का हिसाब बदलता है, जबकि कुल आवेश संरक्षित रहता है।
