मुख्य विचार
मिश्रण में पदार्थ बदलते अनुपात में साथ होते हैं। पृथक्करण कण आकार, विलेयता, चुंबकत्व या वाष्पशीलता जैसे भौतिक अंतर पर आधारित है; कोई एक विधि हर मिश्रण को अलग नहीं करती।
1. एकसमान दिखना केवल एक संकेत है
मिश्रण में पदार्थ साथ होते हैं पर एक निश्चित रासायनिक संघटन नहीं होता। विषमांगी मिश्रण में स्थान-स्थान पर संघटन अलग है, जैसे पानी और दिखती रेत। समांगी मिश्रण विचाराधीन पैमाने पर एकसमान है, जैसे अच्छी तरह मिला नमक का विलयन। एकसमान दिखना अकेला पदार्थ होने का प्रमाण नहीं। रसायन में शुद्ध का अर्थ एक रासायनिक पदार्थ है, आवश्यकतः सुरक्षित, प्राकृतिक या उपयोगी नहीं। शुद्ध जल और रंगहीन नमक विलयन समान दिख सकते हैं। अंतर जानने के लिए वास्तविक गुण की जाँच चाहिए, पारदर्शिता या लेबल पर भरोसा नहीं।
2. घुलना कणों को विलायक में फैलाता है
विलयन में घोलने वाला माध्यम विलायक और घुला पदार्थ विलेय है। ये भूमिकाएँ हैं: जल नमक घोल सकता है और स्वयं दूसरे द्रवों के मिश्रण का हिस्सा भी बनता है। चीनी घुलने पर उसके अणु क्रिस्टल से अलग होकर जल अणुओं के बीच फैलते हैं। सोडियम क्लोराइड के आयन अलग होकर फैलते हैं। विलेय गायब नहीं हुआ; उसका द्रव्यमान रहता है। हिलाने से नया विलायक ठोस तक पहुँचता और घुला पदार्थ सतह से हटता है, इसलिए घुलना तेज़ हो सकता है। इससे उसी तापमान पर अंतिम घुल सकने वाली मात्रा बढ़ना निश्चित नहीं।
3. सांद्रता और संतृप्ति अलग प्रश्न हैं
सांद्रता बताती है कि निश्चित विलयन या विलायक की तुलना में विलेय कितना है। हर में किसकी मात्रा है, हमेशा स्पष्ट करें। द्रव्यमान प्रतिशत = विलेय द्रव्यमान ÷ कुल विलयन द्रव्यमान × 100। संतृप्त विलयन दिए तापमान और दशाओं पर उस विलेय की घुलने की सीमा तक पहुँचा है। अतिरिक्त ठोस बच सकता है; इसका अर्थ कुछ भी न घुलना नहीं। तापमान विलेयता बदल सकता है, पर दिशा और मात्रा विलेय पर निर्भर हैं। सांद्र एक तुलना है, संतृप्त सीमा का कथन। इसलिए सांद्र विलयन आवश्यकतः संतृप्त और तनु विलयन आवश्यकतः शुद्ध नहीं।
4. विलयन, निलंबन और कोलॉइड का अलग व्यवहार
वास्तविक विलयन के घुले कण सामान्य दशाओं में बैठने या साधारण फिल्टर पेपर में रुकने के लिए बहुत छोटे हैं। निलंबन में बड़े फैले कण होते हैं; कई स्थिर रखने पर बैठते और छाने जा सकते हैं। कोलॉइड का कण आकार इन परिचित पैमानों के बीच होता है। दूध कोलॉइडी तंत्र है: एकसमान दिखता है पर वास्तविक आणविक विलयन नहीं। कोलॉइड प्रकाश बिखेर सकते हैं और कई आसानी से नहीं बैठते। प्रकाश प्रकीर्णन संकेत है, हर तरह की शुद्धता की जाँच नहीं। वास्तविक नमूने में कई तरह के फैलाव साथ हो सकते हैं।
5. विधि को भौतिक अंतर से जोड़ें
अवसादन में कण गुरुत्व से बैठते हैं; निस्तारण में ऊपर का द्रव सावधानी से अलग होता है। छानने की बाधा बड़े कण रोकती और द्रव जाने देती है। चुंबकीय पृथक्करण तभी उपयोगी है जब घटकों की चुंबकीय प्रतिक्रिया पर्याप्त अलग हो। उचित दशाओं में क्रिस्टलीकरण घुले ठोस के क्रिस्टल दे सकता है। आसवन में अधिक वाष्पशील घटक वाष्पित होकर संघनित होता है और द्रव संचित होता है। केवल वाष्पीकरण से अवाष्पशील ठोस बचता है, निकला विलायक संचित नहीं होता। ये सिद्धांत हैं, अनजान द्रव गर्म करने के निर्देश नहीं। योजना में प्रयुक्त गुण और मिलने वाला घटक दोनों बताएँ।
विधि से पहले गुण चुनें
| मिश्रण | उपयोगी अंतर | विधि |
|---|---|---|
| पत्थर और सूखी रेत | कण का आकार | छानना |
| रेत और पानी | अघुलनशील ठोस और छिद्र आकार | निस्यंदन |
| पानी में घुला नमक | पानी वाष्पित होता है; नमक बचता है | पर्यवेक्षित प्रदर्शन में वाष्पीकरण |
6. हल उदाहरण: सही हर चुनें
केवल गणना के लिए काल्पनिक आँकड़े: 12 g नमक 108 g पानी में पूरा घुला। कुल विलयन 12 + 108 = 120 g, इसलिए द्रव्यमान प्रतिशत 12/120 × 100 = 10%। 108 से भाग देने पर नमक की तुलना विलायक से होगी, पूरे विलयन से नहीं। अब बिना नमक खोए काल्पनिक 80 g पानी और जोड़ें। नया द्रव्यमान 200 g और नमक 12 g है; प्रतिशत 12/200 × 100 = 6%। तनुकरण ने हर बढ़ाकर सांद्रता घटाई; विलेय नष्ट या निकाला नहीं।
7. हल उदाहरण: तीन घटकों का कागजी पृथक्करण
कल्पना करें कि चिह्नित मिश्रण में रेत, नमक और पानी हैं तथा नमक पूरा घुला है। लक्ष्य रेत और नमक अलग पाना है। पहले छानें: अघुलनशील रेत रुकती है, नमक विलयन निकलता है। छनित को शुद्ध जल कहना गलत होगा क्योंकि घुले आयन भी निकलते हैं। फिर उपयुक्त प्रयोगशाला में नियंत्रित विलायक निष्कासन या क्रिस्टलीकरण से नमक मिलता है। पानी भी संचित करना हो तो उसे उड़ाने के बजाय आसवन चाहिए। क्रम महत्त्वपूर्ण है: पहले पानी निकालने से रेत और नमक साथ रहेंगे। क्रम पहले कण आकार, फिर वाष्पशीलता या विलेयता के अंतर पर आधारित है।
अभ्यास करें
अपनी समझ लागू करें
- काल्पनिक नमूने में 8 g घुली चीनी और 72 g जल है। द्रव्यमान प्रतिशत निकालें और विलेय-विलायक पहचानें।
- चित्र में एक काल्पनिक अघुलनशील ठोस जोड़ें। फिल्टर बनाकर रुकने और निकलने वाले पदार्थ लिखें; वास्तविक प्रयोग जरूरी नहीं।
- जाँचें: द्रव्यमान से 10% चीनी; जल विलायक है। ठोस रुकता पर चीनी का विलयन निकलता है। छनित न शुद्ध जल है, न पीने योग्य सिद्ध हुआ—कारण बताएँ।
अपनी समझ जाँचें
रंगहीन द्रव मिश्रण कैसे हो सकता है?
घुले कण न रंग दे सकते हैं न दिखती सीमाएँ बना सकते हैं। संघटन गुणों या विश्लेषण से जाँचना होगा, केवल रूप से नहीं।
तेज़ हिलाने से अंतिम घुली मात्रा हमेशा बढ़ती है?
नहीं। हिलाना अक्सर घुलने की दर बदलता है। साम्य विलेयता विलेय, विलायक और दशाओं पर निर्भर है; गति और अंतिम क्षमता अलग हैं।
फिल्टर पेपर घुला नमक क्यों नहीं रोकता?
घुले आयन जल के साथ साधारण छिद्रों से निकल जाते हैं। फिल्टर बड़े निलंबित कण अलग करता है, द्रव के हर पदार्थ को नहीं।
आसुत द्रव और वाष्पीकरण का अवशेष अलग क्यों हैं?
आसुत द्रव वाष्पशील घटक की संघनित वाष्प है। अवशेष उस घटक के निकलने पर बचा पदार्थ है। वे प्रक्रिया के अलग हिस्सों से मिलते हैं।
पृथक्करण योजना में लक्ष्य पहले क्यों लिखें?
ठोस पाना, विलायक संचित करना और अशुद्धियाँ जाँचना अलग विधियाँ माँग सकते हैं। एक लक्ष्य की सफल प्रक्रिया दूसरे के जरूरी घटक को निकाल सकती है।
