मुख्य विचार
तापमान ऊष्मीय अवस्था बताता है; तापांतर के कारण हस्तांतरित ऊर्जा ऊष्मा है। इसकी मात्रा पदार्थ, द्रव्यमान, ताप परिवर्तन और अवस्था परिवर्तन पर निर्भर है।
1. तापमान और ऊर्जा में अंतर
तापमान बताता है कि ऊष्मा द्वारा शुद्ध ऊर्जा हस्तांतरण किस ओर होगा: अपने आप अधिक ताप वाली वस्तु से कम ताप वाली वस्तु की ओर। आंतरिक ऊर्जा तंत्र के कणों की गति और परस्पर क्रियाओं से जुड़ी सूक्ष्म ऊर्जा है। यह पदार्थ की मात्रा, प्रकार और अवस्था पर निर्भर है। इसलिए समान तापमान का अर्थ समान आंतरिक ऊर्जा नहीं है। साधारण गैस में अधिक तापमान का संबंध कणों की अधिक औसत अनियमित गतिज ऊर्जा से है; सभी कणों की चाल समान नहीं होती। तापांतर के कारण सीमा पार करती ऊर्जा को ऊष्मा कहते हैं; यह वस्तु में रखा कोई पदार्थ नहीं है।
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2. तापमापी की प्रक्रिया समझें
तापमापी मापी जा रही वस्तु से ऊर्जा का आदान-प्रदान करता है। पर्याप्त संपर्क के बाद आदर्श तापमापी वस्तु के साथ ऊष्मीय संतुलन में आता है: दोनों के तापमान समान और उनके बीच शुद्ध ऊष्मा हस्तांतरण शून्य होता है। जल्दी पढ़ने पर वस्तु के बजाय तापमापी की बदलती अवस्था मिल सकती है। सेल्सियस ताप °C में और SI ताप केल्विन, K में लिखा जाता है; केल्विन में डिग्री चिह्न नहीं है। संबंध है: K में T = °C में तापमान + 273.15। 1 °C और 1 K के तापांतर बराबर हैं। त्वचा से ऊर्जा हस्तांतरण की दर भी अनुभूति बदलती है, इसलिए स्पर्श भरोसेमंद तापमापी नहीं है।
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3. तापन और अवस्था परिवर्तन का हिसाब
एक ही अवस्था में, जहाँ विशिष्ट ऊष्मा धारिता लगभग स्थिर हो, Q = mcΔT है। यहाँ Q पदार्थ को मिली ऊर्जा जूल में, m द्रव्यमान किलोग्राम में, c विशिष्ट ऊष्मा धारिता J/(kg K) में और ΔT अंतिम तथा प्रारंभिक ताप का अंतर K या °C में है। अधिक c का अर्थ समान ताप वृद्धि के लिए प्रति किलोग्राम अधिक ऊर्जा चाहिए। स्थिर दाब पर शुद्ध पदार्थ के संतुलित पिघलने या उबलने में ताप स्थिर रहते हुए ऊर्जा कणों की व्यवस्था बदल सकती है। तब Q = mL उपयोगी है, जहाँ L विशिष्ट गुप्त ऊष्मा J/kg में है। अवस्था परिवर्तन के पार केवल mcΔT न लगाएँ।
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4. पदार्थ में ऊर्जा का चालन
चालन में पड़ोसी कण परस्पर क्रिया से ऊर्जा बाँटते हैं; पदार्थ का सामूहिक प्रवाह नहीं होता। धातुओं में गतिशील इलेक्ट्रॉन भी ऊर्जा प्रभावी ढंग से ले जाते हैं। इसीलिए त्वचा से कम ताप पर रखे समान तापमान वाले धातु और कपड़े में धातु अधिक ठंडी लग सकती है: वह त्वचा से ऊर्जा तेजी से हटाती है। कुचालक यह हस्तांतरण धीमा करता है; ठंड पैदा नहीं करता और ऊर्जा आदान-प्रदान पूरी तरह रोकता भी नहीं। कई ऊष्मारोधकों में फँसी हवा चालन घटाती और हवा का प्रवाह सीमित करती है। इसलिए आसपास के ताप के अनुसार ऊष्मारोधन ठंडे पात्र का गर्म होना या गर्म पात्र का ठंडा होना, दोनों धीमा कर सकता है।
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5. बहते तरल और चलता विकिरण
संवहन में द्रव या गैस का सामूहिक प्रवाह ऊर्जा ले जाता है। उपयुक्त परिस्थितियों में गर्म क्षेत्र का घनत्व कम होता है, वह गुरुत्व क्षेत्र में ऊपर उठता है और ठंडा द्रव उसका स्थान लेता है; इस तरह परिसंचरण बनता है। पंखा भी बलपूर्वक प्रवाह करा सकता है। विकिरण विद्युतचुंबकीय तरंगों द्वारा ऊर्जा ले जाता है और भौतिक माध्यम नहीं माँगता; सौर ऊर्जा इसी तरह अंतरिक्ष पार करती है। वस्तुएँ विकिरण उत्सर्जित करती हैं और आसपास का विकिरण अवशोषित भी करती हैं; शुद्ध हस्तांतरण दोनों पर निर्भर है। वास्तविक पात्र में तीनों विधियाँ साथ चल सकती हैं। एक विधि की मौजूदगी का अर्थ अन्य विधियों की अनुपस्थिति नहीं है।
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6. हल उदाहरण: पानी की ऊर्जा का हिसाब
कागज पर काल्पनिक गणना: 0.50 kg पानी का ताप 25 °C से 35 °C होता है। c = 4200 J/(kg K) लें, वाष्पन छोड़ें और केवल पानी को मिली ऊर्जा गिनें। ताप वृद्धि 10 K है, इसलिए Q = 0.50 × 4200 × 10 = 21,000 J यानी 21 kJ। इसी सन्निकटन में इतनी ऊर्जा 0.25 kg पानी का ताप 20 K बढ़ाएगी। वास्तविक स्रोत पात्र और आसपास को भी ऊर्जा देता है, इसलिए उसकी ऊर्जा खपत 21 kJ के बराबर होना आवश्यक नहीं। ये काल्पनिक गणनाएँ हैं, पानी गर्म करने के निर्देश नहीं।
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7. हल उदाहरण: अंतिम ताप का अनुमान
काल्पनिक ऊष्मारोधित मिश्रण में 60 °C का 0.20 kg पानी और 20 °C का 0.30 kg पानी मिलते हैं। दोनों का स्थिर c समान, अवस्था परिवर्तन शून्य और पात्र से ऊर्जा विनिमय नगण्य मानें। अंतिम ताप T हो। गर्म पानी की खोई ऊर्जा = ठंडे पानी की मिली ऊर्जा: 0.20c(60 − T) = 0.30c(T − 20)। c काटने पर 12 − 0.20T = 0.30T − 6, इसलिए T = 36 °C। प्रत्येक हस्तांतरण 20,160 J है। उत्तर शुरुआती तापों के बीच और 20 °C के अधिक पास है, क्योंकि वहाँ अधिक पानी था। 60 और 20 का साधारण औसत लेना गलत ढंग से समान द्रव्यमान मानना होगा।
ऊर्जा के आदान-प्रदान को संतुलित करें
| पानी का भाग | द्रव्यमान | तापमान बदलाव | ऊर्जा |
|---|---|---|---|
| गर्म | 0.20 kg | 60 → 36 °C | 20,160 J खोए |
| ठंडा | 0.30 kg | 20 → 36 °C | 20,160 J पाए |
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अभ्यास करें
लागू करें और अपना तर्क जाँचें
- काल्पनिक पदार्थ के लिए m = 0.40 kg और c = 1000 J/(kg K) है। बिना अवस्था परिवर्तन ताप 15 K बढ़ता है। तंत्र पहचानें और मिली ऊर्जा निकालें।
- यदि हस्तांतरण में 120 s लगें, तो पदार्थ में जाने वाली औसत शक्ति निकालें। वास्तविक स्रोत की अन्यत्र जाने वाली ऊर्जा के तीर बनाएँ।
- जाँचें: Q = 6000 J और औसत शक्ति = 6000/120 = 50 W। पदार्थ चुना गया तंत्र है। आसपास ऊर्जा खोने वाले स्रोत को बताई ताप वृद्धि के लिए 6000 J से अधिक देना होगा।
अपनी समझ जाँचें
क्या समान ताप की वस्तुओं की आंतरिक ऊर्जा अलग हो सकती है?
हाँ। आंतरिक ऊर्जा मात्रा, पदार्थ और अवस्था पर भी निर्भर है। समान ताप ऊष्मीय संतुलन बताता है, बराबर कुल सूक्ष्म ऊर्जा नहीं।
वस्तु से लगे तापमापी की रीडिंग क्यों बदल सकती है?
वह अभी ऊष्मीय संतुलन की ओर बढ़ रहा हो सकता है। ऊर्जा आदान-प्रदान उसका ताप बदलता है, जब तक मापन स्थिर न हो जाए।
क्या स्थिर ताप का अर्थ हमेशा ऊर्जा नहीं मिली है?
नहीं। ऊर्जा अवस्था परिवर्तन करा सकती है या बाहर जाती ऊर्जा की बराबरी कर सकती है। केवल ताप पूरा ऊर्जा हिसाब नहीं बताता।
ऊष्मारोधन ठंडी बोतल को ठंडा रखने में भी क्यों मदद करता है?
वह गर्म आसपास से बोतल में ऊर्जा आने को धीमा करता है, जैसे गर्म बोतल से ऊर्जा बाहर जाना धीमा कर सकता है।
विकिरण निर्वात पार करता है, संवहन क्यों नहीं?
विद्युतचुंबकीय तरंगों को भौतिक वाहक नहीं चाहिए। संवहन में ऊर्जा ले जाने के लिए गतिशील पदार्थ चाहिए।
