मुख्य विचार
स्वतंत्रता बाधाओं और स्वायत्त कर्तृत्व से, समानता लोगों की किस दृष्टि से बराबरी हो इससे, और न्याय अधिकारों, प्रक्रियाओं तथा वितरण से संबंधित है। ये मूल्य एक-दूसरे को सहारा दे सकते हैं, पर लागू करते समय संबंधित भेदों, वास्तविक अवसरों और दूसरों पर पड़ने वाले भार के बारे में कारण चाहिए।
1. तीन प्रश्न जिन्हें मिलाना नहीं चाहिए
स्वतंत्रता पूछती है कि लोग क्या कर सकते हैं और अपने जीवन को दिशा कैसे दे सकते हैं। समानता पूछती है कि संबंधित दृष्टि से उनका व्यवहार या स्थान बराबर है या नहीं। न्याय पूछता है कि लोगों को क्या मिलना चाहिए और व्यवस्थाएँ उचित हैं या नहीं। पुस्तकालय सबको आवेदन की अनुमति और समान फॉर्म दे सकता है, फिर भी चयन अन्यायपूर्ण होगा यदि जगह केवल आयोजक के मित्रों को मिले। यहाँ औपचारिक अनुमति, एक जैसा व्यवहार और निष्पक्ष प्रक्रिया अलग पड़ जाते हैं। इसके विपरीत, अलग बाधाओं वाले विद्यार्थियों को अलग सहायता देना समान सम्मान का आधार हो सकता है। एक शब्द से मामला तय नहीं होगा। संबंधित स्वतंत्रता, समानता का आयाम और न्याय का सिद्धांत स्पष्ट करें। फिर देखें कि किसके हित और भार प्रभावित हैं। इससे आकर्षक नारों की प्रतियोगिता जाँचने योग्य तर्क में बदलती है।
स्रोत: समानता, स्टैनफोर्ड दर्शन विश्वकोश ↗ · सामाजिक न्याय, एनसीईआरटी राजनीति सिद्धांत ↗
2. हस्तक्षेप का अभाव और आत्मनिर्देशन
नकारात्मक स्वतंत्रता बाधा या हस्तक्षेप के अभाव से संबंधित है: क्या कोई विद्यार्थी को आने से रोक रहा है? सकारात्मक स्वतंत्रता आत्मनिर्देशन से जुड़ी है, जिसमें अपने विचारपूर्वक चुने उद्देश्यों के अनुसार काम करना शामिल है। इसका अर्थ बुरी और अच्छी स्वतंत्रता का भेद नहीं; सकारात्मक स्वतंत्रता को केवल लाभ मिलने में भी नहीं घटाना चाहिए। व्यक्ति पर औपचारिक रोक न हो, फिर भी प्रभावी कर्तृत्व की बाधाएँ हो सकती हैं। उलटे, अधिकारी जीवन सुधारने का दावा करके व्यक्ति के चुनाव दबा सकता है। इन संभावनाओं से दबाव, स्वायत्तता और सहायता के गंभीर प्रश्न उठते हैं। इस भेद से आइज़ाया बर्लिन और अन्य चिंतकों के प्रभावशाली विवाद जुड़े हैं, लेकिन कोई अवधारणा हर स्थिति की तैयार नीति नहीं देती। स्वतंत्रता बढ़ने का दावा करने से पहले व्यक्ति, बाधा और संभावित कार्य स्पष्ट करें।
स्रोत: सकारात्मक और नकारात्मक स्वतंत्रता, स्टैनफोर्ड दर्शन विश्वकोश ↗
3. समान संसाधन से समान अवसर आवश्यक नहीं
नैतिक समानता बराबर मानवीय स्थान से संबंधित है, इस दावे से नहीं कि सभी की क्षमताएँ या परिस्थितियाँ समान हैं। समानता की माँग में माप स्पष्ट होना चाहिए: आय, संसाधन, अवसर, क्षमता, राजनीतिक आवाज या कुछ और। अमर्त्य सेन का क्षमता-दृष्टिकोण पूछता है कि लोग वास्तव में क्या कर और बन सकते हैं। अर्जित कार्य या अवस्था को उपलब्धि कह सकते हैं; उसे पाने का वास्तविक अवसर क्षमता है। दो विद्यार्थियों को वही मुद्रित पाठ मिले, लेकिन उसका रूप केवल एक पढ़ सके। सुलभ पाठ दोनों में से किसी को पढ़ने के लिए बाध्य किए बिना अवसर बदल सकता है। व्यक्तिगत, सामाजिक और पर्यावरणगत परिस्थितियाँ तय करती हैं कि संसाधन उपयोगी संभावनाएँ कैसे बनें। इससे हर वितरण स्वयं तय नहीं होता। यह ऐसी जानकारी सामने लाता है जो केवल संसाधन की तुलना में छूटती है, और अवसर होने तथा उसे अपनाने के लिए मजबूर होने का अंतर बचाता है।
संसाधन से वास्तविक अवसर तक
- संसाधनमुद्रित पाठ मिलता है।
- उपयोग की परिस्थितियाँपढ़ने योग्य प्रारूप, भाषा और समय महत्त्वपूर्ण हैं।
- क्षमताविद्यार्थी को पढ़ने का वास्तविक अवसर है।
- चुनाव और उपलब्धिपढ़ने का चुनाव अवसर को कार्य में बदलता है।
स्रोत: क्षमता दृष्टिकोण, स्टैनफोर्ड दर्शन विश्वकोश ↗ · समानता, स्टैनफोर्ड दर्शन विश्वकोश ↗
4. आवश्यकता, योगदान और निष्पक्ष शर्तें अलग दिशा खींच सकती हैं
वितरण समान हिस्सों, संबंधित आवश्यकता, योगदान या अन्य उचित मानदंडों पर हो सकता है। हर सिद्धांत अलग प्रश्न का उत्तर देता है; किसी को चुनते समय बताना होगा कि वितरित वस्तु के लिए वह उपयुक्त क्यों है। किए काम का पुरस्कार देना बुनियादी अध्ययन तक पहुँच सुनिश्चित करने से अलग है। जॉन रॉल्स का अज्ञान का आवरण अपने सामाजिक स्थान, प्रतिभा या लाभ जाने बिना सिद्धांतों पर विचार करने को कहता है। यह जाँचता है कि स्वार्थ-संबंधी जानकारी हमारे स्वीकार किए नियमों को कितना प्रभावित करती है। इसका अर्थ समाज के सभी सामान्य तथ्य भूलना नहीं, न इससे हर स्थानीय विवाद का सर्वसम्मत उत्तर स्वतः निकलता है। निष्पक्ष व्यवस्था को प्रक्रियाएँ भी चाहिए: सार्वजनिक मानदंड, गलतियों पर आपत्ति का अवसर और समान रूप से नियम लागू करना। अच्छे परिणाम अकेले निर्णय में पक्षपात को उचित नहीं बनाते।
स्रोत: सामाजिक न्याय, एनसीईआरटी राजनीति सिद्धांत ↗ · मूल स्थिति, स्टैनफोर्ड दर्शन विश्वकोश ↗
5. उदाहरण: चार कंप्यूटर और आठ विद्यार्थी
काल्पनिक केंद्र में चार कंप्यूटर एक घंटे के लिए उपलब्ध हैं और आठ विद्यार्थी हैं। बराबर बारी देने पर प्रत्येक को तीस मिनट मिलेंगे: चार गुणा साठ से 240 कंप्यूटर-मिनट हुए, जिन्हें आठ से बाँटा। यह संगत प्रारंभिक नियम है, लेकिन मानें कि चार विद्यार्थियों के घर उपयुक्त कंप्यूटर हैं और चार के पास दूसरा साधन नहीं। आवश्यकता-संवेदी प्रस्ताव बिना विकल्प वालों के लिए भविष्य के अतिरिक्त सत्र रख सकता है। योगदान-आधारित प्रस्ताव तैयारी का काम पूरा करने वालों को पुरस्कार देगा। तुलना में उद्देश्य स्पष्ट करें। लक्ष्य अभ्यास का निष्पक्ष अवसर है तो वैकल्पिक पहुँच प्रासंगिक है; लक्ष्य किए कार्य का पुरस्कार है तो योगदान अलग तरह महत्त्वपूर्ण हो सकता है। कोई प्रस्ताव गुप्त रूप से मित्रों के लिए न बनाया जाए। नियम सार्वजनिक करें, आवश्यक जानकारी सम्मान से जाँचें और सुधार का अवसर दें। गणना उपलब्ध समय तय करती है, नैतिक सिद्धांत स्वयं नहीं।
स्रोत: सामाजिक न्याय, एनसीईआरटी राजनीति सिद्धांत ↗ · क्षमता दृष्टिकोण, स्टैनफोर्ड दर्शन विश्वकोश ↗
7. उचित निर्णय भी संशोधन के लिए खुला रहता है
समर्थनीय प्रस्ताव अपना सिद्धांत, उसे प्रासंगिक बनाने वाले तथ्य और निष्कर्ष की सीमा स्पष्ट करता है। केंद्र की पहुँच-संबंधी मान्यताएँ गलत निकलें तो अच्छे इरादे वाला वितरण भी बदलना पड़ सकता है। बहुमत को लाभ हो, इससे अकेले यह तय नहीं होता कि अल्पमत का बुनियादी स्थान सम्मानित है। नियम लगातार समान रूप से लागू हो, तब भी पूछना होगा कि नियम स्वयं उचित है या नहीं। ये भेद स्वतंत्रता, समानता और न्याय को जोड़ते हैं, बिना यह दिखाए कि वे हमेशा सरलता से मेल खाते हैं। किन दावों को प्राथमिकता मिले, इस पर कारणपूर्ण असहमति रह सकती है। उचित प्रतिक्रिया है लाभ-हानि और चुने सिद्धांत को स्पष्ट करना, विवादित निर्णय को शुद्ध गणना बनाकर छिपाना नहीं। राजनीतिक दर्शन दूसरों को कारण देने की क्षमता विकसित करता है, साथ में साक्ष्य और मूल्यों दोनों के लिए जवाबदेही बनाए रखता है।
स्रोत: सामाजिक न्याय, एनसीईआरटी राजनीति सिद्धांत ↗ · समानता, स्टैनफोर्ड दर्शन विश्वकोश ↗
अभ्यास करें
अभ्यास: वितरण का नियम बनाएँ और उसका पक्ष रखें
- मानें कि छह विद्यार्थी तीन समान एक-घंटे के अभ्यास-सत्र चाहते हैं। बराबर हिस्से का विकल्प लिखें: सत्र बाँटे जा सकें तो प्रत्येक को तीस मिनट।
- एक संबंधित भेद जोड़ें, जैसे दो विद्यार्थियों के पास दूसरा साधन न होना। बताएँ कि सीखने का अवसर बढ़ाने के लक्ष्य के लिए यह क्यों महत्त्वपूर्ण है।
- नियम और गलत जानकारी सुधारने का तरीका सुझाएँ। कारणपूर्ण उत्तर बराबर बारी रख सकता है या बाद में प्राथमिकता दे सकता है, यदि सिद्धांत और भार स्पष्ट हों।
- अज्ञान के आवरण से जाँचें: अपनी पहुँच के लाभ जाने बिना क्या प्रक्रिया का समर्थन करेंगे? सर्वसम्मति का दावा करने के बजाय बची हुई आपत्ति लिखें।
अपनी समझ जाँचें
क्या समान नैतिक स्थान का अर्थ समान आवश्यकताएँ है?
नहीं। अलग बाधाओं वाले लोग समान सम्मान के अधिकारी हो सकते हैं। संबंधित भेद अलग सहायता का आधार बन सकते हैं।
सकारात्मक स्वतंत्रता केवल लाभ मिलने से अधिक क्यों है?
वह कर्तृत्व और आत्मनिर्देशन से जुड़ी है। विचारपूर्वक किए चुनाव के विरुद्ध थोपा लाभ इनका सम्मान नहीं कर सकता।
क्षमता और उपलब्धि में क्या अंतर है?
क्षमता कुछ करने या बनने का वास्तविक अवसर है; उपलब्धि उसका प्राप्त होना है। अवसर न चुनने से उसका अभाव सिद्ध नहीं होता।
कंप्यूटर-मिनट की गणना क्या तय करती है?
वह उपलब्ध समय और बराबर विभाजन बताती है। वितरण समानता, आवश्यकता या योगदान से हो, यह तय नहीं करती।
क्या अज्ञान का आवरण समाज के सभी तथ्य अनदेखे करने को कहता है?
नहीं। वह अपना विशेष स्थान जानने को हटाता है, निष्पक्ष सिद्धांत सोचने के लिए जरूरी सामान्य तथ्यों को नहीं।
बहुमत का लाभ अपर्याप्त क्यों हो सकता है?
प्रस्ताव में अधिकार, निष्पक्ष प्रक्रिया और भार सहने वालों का स्थान भी देखना होगा। केवल लाभार्थी गिनना न्याय के हर प्रश्न का उत्तर नहीं।
