पूर्णिमा लल्लन शर्मा फाउंडेशन · स्थापना 2021
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निःशुल्क अध्ययन शृंखला

गीता, उपनिषद और योग का अनुशासन

संदर्भित अंशों और मनन से कर्म, भक्ति, आत्म-जिज्ञासा और योग के आठ अंग सीखें।

4 पाठ · अपनी गति से सीखें

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भगवद्गीता पांडुलिपि के चार सजाए हुए पत्र, जिन पर संस्कृत लेखन और रंगीन फूलों व ज्यामितीय आकृतियों की किनारी है।
लाइब्रेरी ऑफ़ कांग्रेस के संग्रह में उत्तर भारत की उन्नीसवीं सदी की भगवद्गीता पांडुलिपि। · Unknown manuscript maker; Library of Congress · Public domain

सीखें, अभ्यास करें, समझाएँ

व्याख्या पढ़ने से पहले अभ्यास आजमाएँ। अपनी समझ जाँचने वाले प्रश्नों के उत्तर अपने शब्दों में दें, फिर दिए उत्तर से अपने तर्क की तुलना करें। आगे बढ़ने से पहले कठिन हिस्सा फिर पढ़ें। खाते या भुगतान की जरूरत नहीं है।

  1. 01

    कर्मयोग: आसक्ति छोड़कर जिम्मेदारी से कर्म करना

    परिणाम अनिश्चित हो तो काम आध्यात्मिक साधना कैसे बनता है? भगवद्गीता कर्तव्य, समर्पण, दूसरों की चिंता और कर्म करने वाले के स्वभाव से उत्तर विकसित करती है। यह पाठ किसी एक प्रसिद्ध श्लोक से आगे जाकर इन संबंधों को समझाता है।

    सीखने का लक्ष्य: यज्ञ और लोकसंग्रह समझाएँ, अनासक्ति को लापरवाही से अलग करें और साधारण जिम्मेदारी में गीता के कर्म तथा कर्ता संबंधी विचार लागू करें।

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  2. 02

    भगवद्गीता में ज्ञान और भक्ति

    भगवद्गीता आत्मा के विषय में विचार को श्री कृष्ण के प्रति प्रेमपूर्ण संबंध से जोड़ती है। समझिए कि विवेकपूर्ण ज्ञान, श्रद्धा, निरंतर अभ्यास और दूसरों के प्रति संवेदनशील व्यवहार एक-दूसरे को कैसे सहारा देते हैं।

    सीखने का लक्ष्य: ज्ञान और भक्ति के तीन संबंध समझाएँ, अध्याय 12 के एक क्रम का अर्थ बताएँ और ऐसा अभ्यास बनाएँ जो उपासना को नैतिक सजगता से जोड़े।

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  3. 03

    उपनिषद: आत्मा, ब्रह्म और समझ की खोज

    उपनिषद पूछते हैं कि जीवन को अर्थपूर्ण क्या बनाता है और बदलते अनुभव के मूल में क्या है। उनके संवाद प्रश्नों, उपमाओं और अनुशासित ध्यान द्वारा आत्मा तथा ब्रह्म का विचार करते हैं।

    सीखने का लक्ष्य: तीन उपनिषदिक शिक्षाएँ इस तरह समझाएँ कि उपमा और शाब्दिक वर्णन में भ्रम न हो, तथा आत्मविचार को केवल सार्वजनिक छवि सुधारने से अलग पहचानें।

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  4. 04

    योग के आठ अंग: एक जुड़ा हुआ अनुशासन

    पतंजलि का योगसूत्र व्यवहार, शारीरिक स्थिरता, ध्यान और बोध को जोड़ता है। उसके आठ अंग साथ समझ में आते हैं: एकाग्र चित्त और नैतिक जीवन एक गंभीर आध्यात्मिक अनुशासन के भाग हैं।

    सीखने का लक्ष्य: हर अंग की भूमिका समझाएँ, योगसूत्र की दो विशिष्ट शिक्षाएँ सामान्य व्यवहार में लगाएँ और आरंभिक अभ्यास को ग्रंथ में वर्णित उच्च आध्यात्मिक उपलब्धियों से अलग पहचानें।

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