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निःशुल्क अध्ययन शृंखला

महाकाव्य, पर्व और जीवंत उपासना

महाकाव्यों के निर्णय, क्षेत्रीय उत्सव और मंदिर उपासना के अर्थ समझें।

4 पाठ · अपनी गति से सीखें

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कर्नाटक के हम्पी में हेमकूट पहाड़ी का पत्थर का मंडप और विरूपाक्ष मंदिर का दृश्य।
हम्पी, कर्नाटक · Ingo Mehling · CC BY-SA 4.0

सीखें, अभ्यास करें, समझाएँ

व्याख्या पढ़ने से पहले अभ्यास आजमाएँ। अपनी समझ जाँचने वाले प्रश्नों के उत्तर अपने शब्दों में दें, फिर दिए उत्तर से अपने तर्क की तुलना करें। आगे बढ़ने से पहले कठिन हिस्सा फिर पढ़ें। खाते या भुगतान की जरूरत नहीं है।

  1. 01

    वाल्मीकि रामायण में कर्तव्य और नेतृत्व

    रामायण ऐसे निर्णयों से शिक्षा देती है जिनका प्रभाव परिवार, राज्य, मित्रों और शरण चाहने वालों पर पड़ता है। भरत का न्यास-भाव, राम के प्रश्न और हनुमान की सावधान वाणी जिम्मेदार नेतृत्व के अलग रूप दिखाते हैं।

    सीखने का लक्ष्य: रामायण के निर्दिष्ट प्रसंगों में नेतृत्व के तीन निर्णय समझें और उनके तर्क को सामान्य जिम्मेदारी में अपनाएँ; महाकाव्य के राज्य को आधुनिक संस्था के समान न मानें।

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  2. 02

    महाभारत में धर्म और कठिन निर्णय

    महाभारत निष्ठा, महत्वाकांक्षा, अन्याय, करुणा और विजय की कीमत के माध्यम से कर्तव्य की जाँच करती है। उसके कठिन प्रसंग पाठक से निर्णय का कारण माँगते हैं और पूछते हैं कि सुविधाजनक उत्तर किसकी पीड़ा अनदेखी कर देता है।

    सीखने का लक्ष्य: महाकाव्य के तीन निर्णयों का तर्क समझाएँ, कारण समझने और बहाना बनाने में अंतर करें तथा दैनिक नैतिक दुविधा की स्पष्ट विधि से जाँच करें।

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  3. 03

    हिंदू पर्व: पवित्र समय, ऋतुएँ और साझा जीवन

    पर्व पूजा, स्मरण किए जाने वाले पवित्र प्रसंगों, ऋतु के काम, भोजन, कला और आतिथ्य को जोड़ सकता है। कुछ उत्सवों का क्रम ध्यान से समझने पर दिखता है कि पर्व केवल तारीख या सजावट का विषय नहीं है।

    सीखने का लक्ष्य: तीन अनुष्ठानों का क्रम और अर्थ समझाएँ, क्षेत्रीय उदाहरण सही पहचानें और परिवार या समुदाय के उत्सव में विचारपूर्वक योगदान की योजना बनाएँ।

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  4. 04

    मंदिर, पूजा और पवित्र स्थान

    मंदिर में देवस्वरूप, सुव्यवस्थित स्थान और लगातार चलने वाली उपासना एक साथ आते हैं। इनके संबंध को समझने से मंदिर का नाम जानने के आगे बढ़कर उसके दर्शन का अर्थ समझ आता है।

    सीखने का लक्ष्य: मंदिर के मुख्य स्थान पहचानें, दर्शन, आरती, नैवेद्य और प्रसाद का अंतर समझें तथा शास्त्र और तिरुमला के उदाहरण से पूजा का क्रम समझाएँ।

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