मुख्य विचार
गति बताती है कि स्थिति कैसे बदलती है। परिणामी बल वेग में बदलाव समझाता है। कार्य और ऊर्जा ऐसे स्थानांतरण बताते हैं जिनसे गति, ऊँचाई या आसपास का ताप बदल सकता है। ये विचार जुड़े हैं, लेकिन अलग सवालों के उत्तर देते हैं।
1. गति एक संदर्भ बिंदु के सापेक्ष होती है
स्थिति किसी चुने हुए संदर्भ के मुकाबले जगह बताती है। बस में बैठा यात्री सीट के सापेक्ष स्थिर है, लेकिन सड़क के सापेक्ष चल रहा है। दोनों बातें सही हो सकती हैं क्योंकि संदर्भ अलग हैं। सीधी सड़क पर स्कूल के गेट को शून्य और पूर्व को धनात्मक मानें। +40 मीटर का अर्थ गेट से चालीस मीटर पूर्व; −10 मीटर का अर्थ दस मीटर पश्चिम है।
दूरी तय किए गए पूरे रास्ते की लंबाई है। विस्थापन शुरुआती से अंतिम स्थिति का दिशासहित बदलाव है। 60 मीटर पूर्व और फिर 20 मीटर पश्चिम चलें। दूरी 60 + 20 = 80 मीटर है, जबकि विस्थापन +60 − 20 = +40 मीटर। गेट पर वापस आने पर कुल विस्थापन शून्य होगा, जबकि दूरी तय हुई होगी।
2. चाल और वेग में अंश अलग होता है
औसत चाल = कुल दूरी ÷ कुल लगा समय। 80 मीटर की यात्रा में 40 सेकंड लगे तो औसत चाल 80 ÷ 40 = 2 मीटर/सेकंड है। औसत वेग = विस्थापन ÷ लगा समय, इसलिए 40 ÷ 40 = 1 मीटर/सेकंड पूर्व है। पूरी यात्रा का औसत निकालते समय रुकने का समय भी जोड़ें। औसत का अर्थ यह नहीं कि हर सेकंड वही चाल थी।
इकाइयाँ गलत अर्थ से बचाती हैं। 36 किलोमीटर/घंटा को मीटर/सेकंड में बदलें: 36 × 1,000 ÷ 3,600 = 10। गोल रास्ते पर साइकिल की चाल समान हो सकती है, लेकिन दिशा बदलने से वेग लगातार बदलता है। इसलिए “स्थिर चाल” और “स्थिर वेग” एक नहीं। स्थिर वेग में चाल और दिशा दोनों नहीं बदलते।
3. स्थिति–समय ग्राफ़ एक कहानी बताता है
नीचे के ग्राफ़ में सीधे रास्ते पर पूर्व की ओर यात्रा मानें। 0 सेकंड पर शुरुआत में हैं; 5 सेकंड बाद 10 मीटर पूर्व। 5 से 10 सेकंड तक वहीं रुकते हैं। फिर 15 सेकंड पर 30 मीटर पहुँचते हैं। बिंदु की ऊँचाई स्थिति बताती है, चाल नहीं। ढलान, यानी स्थिति का बदलाव ÷ समय का बदलाव, हर सीधे हिस्से का वेग देती है।
पहले हिस्से का वेग 10 ÷ 5 = 2 मीटर/सेकंड पूर्व है। क्षैतिज हिस्से में वेग शून्य है। अंतिम में (30 − 10) ÷ (15 − 10) = 4 मीटर/सेकंड पूर्व। रुकने सहित पूरी यात्रा की औसत चाल 30 ÷ 15 = 2 मीटर/सेकंड है। ये बनाए हुए शिक्षण मान हैं। सबसे अधिक ढलान इस यात्रा का सबसे तेज़ हिस्सा बताती है; सबसे ऊँचा बिंदु केवल पूर्व की ओर सबसे दूर स्थिति बताता है।
4. त्वरण वेग में बदलाव है
सीधी रेखा में औसत त्वरण = (अंतिम वेग − प्रारंभिक वेग) ÷ समयांतराल। ट्रॉली 2 सेकंड में 1 से 5 मीटर/सेकंड पर पहुँचे तो औसत त्वरण (5 − 1) ÷ 2 = 2 मीटर/सेकंड² है। त्वरण स्थिर रहे तो हर सेकंड वेग में दो मीटर/सेकंड का बदलाव होता है। इसका अर्थ दो वर्ग मीटर चलना नहीं है।
पूर्व धनात्मक हो और पूर्व जाती ट्रॉली +5 से +1 मीटर/सेकंड पर धीमी हो तो त्वरण ऋणात्मक है। ऋण चिह्न चुनी दिशा के सापेक्ष दिशा बताता है; हर स्थिति में धीमा होना नहीं। पश्चिम जाता पिंड ऋणात्मक त्वरण के साथ तेज़ भी हो सकता है। इसलिए सूत्र में संख्या रखने से पहले दिशा स्पष्ट करना उपयोगी है।
5. गति समझने से पहले बलों को जोड़ें
बल ऐसी परस्पर क्रिया है जो गति बदल सकती है। बल का परिमाण और दिशा दोनों होते हैं। ट्रॉली को पूर्व की ओर 15 न्यूटन से धकेला जाए और घर्षण पश्चिम की ओर 5 न्यूटन हो तो परिणामी क्षैतिज बल 10 न्यूटन पूर्व है। स्थिर द्रव्यमान के सरल मॉडल में परिणामी बल F = ma है: m किलोग्राम में द्रव्यमान और a मीटर/सेकंड² में त्वरण है। 5 किलोग्राम ट्रॉली का त्वरण 10 ÷ 5 = 2 मीटर/सेकंड² पूर्व होगा। केवल धक्का नहीं, परिणामी बल लें।
मेज़ पर रखी पुस्तक पर नीचे गुरुत्व बल और ऊपर मेज़ का सहारा लगता है। दोनों संतुलित हैं, इसलिए वेग नहीं बदलता। चलती वस्तु पर भी संतुलित बल हो सकते हैं: सीधी सड़क पर आगे का बल प्रतिरोध को संतुलित करे तो वाहन स्थिर वेग से चल सकता है। न्यूटन का पहला नियम शून्य परिणामी बल की बात करता है, हर बल के अनुपस्थित होने की नहीं।
6. क्रिया और प्रतिक्रिया अलग वस्तुओं पर लगती हैं
आप दीवार को धकेलें तो दीवार बराबर और विपरीत बल से आपको धकेलती है। आपके शरीर की गणना में ये रद्द नहीं होते, क्योंकि एक दीवार पर और दूसरा आप पर लगता है। इसके विपरीत भार और मेज़ का सहारा दोनों पुस्तक पर लगते हैं; वे पुस्तक की बल-गणना में संतुलित हो सकते हैं। “विपरीत बल” और न्यूटन के तीसरे नियम की जोड़ी का अंतर समझें।
7. कार्य एक खास ऊर्जा स्थानांतरण का माप है
विस्थापन की दिशा में स्थिर बल हो तो कार्य = बल × उस दिशा में तय दूरी। 3 मीटर विस्थापन की दिशा में 10 न्यूटन बल 30 जूल कार्य करता है। एक जूल एक न्यूटन मीटर है। विपरीत दिशा का बल वस्तु पर ऋणात्मक कार्य करता है; फिसलती वस्तु पर घर्षण अक्सर ऐसा करता है। बल तिरछा हो तो विस्थापन की दिशा वाला उसका घटक ही योगदान देता है।
बैग स्थिर पकड़ना थकाता है, लेकिन बैग का विस्थापन शून्य है; इसलिए उस अवधि में ऊपर का बल स्थिर बैग पर यांत्रिक कार्य नहीं करता। मांसपेशियाँ फिर भी रासायनिक ऊर्जा उपयोग करती हैं। भौतिकी मेहनत को नकारती नहीं, एक खास मापने योग्य स्थानांतरण परिभाषित करती है। शक्ति कार्य करने की दर है: 3 सेकंड में 60 जूल कार्य से औसत शक्ति 20 वाट होगी।
8. पहले और बाद की ऊर्जा का हिसाब रखें
प्रकाश की चाल से बहुत कम सामान्य गति पर गतिज ऊर्जा = ½mv², जहाँ m द्रव्यमान और v चाल है। 3 मीटर/सेकंड से चलती 2 किलोग्राम वस्तु की ऊर्जा ½ × 2 × 3² = 9 जूल है। चाल दुगुनी, 6 मीटर/सेकंड करने पर 36 जूल होगी: चार गुनी, दो गुनी नहीं। पृथ्वी की सतह के पास h ऊँचाई बढ़ाने पर गुरुत्व स्थितिज ऊर्जा लगभग mgh बढ़ती है। अभ्यास के लिए g = 10 मीटर/सेकंड² लें तो 2 किलोग्राम बैग 1 मीटर उठाने पर लगभग 20 जूल बढ़ेगी।
घर्षण से ट्रॉली धीमी हो तो गतिज ऊर्जा सतहों और आसपास की ऊष्मीय ऊर्जा में बदलती है, कुछ ध्वनि भी बनती है। ऊर्जा गायब नहीं हुई। उपयोगी हिसाब में तंत्र और उसकी सीमा के पार स्थानांतरण बताए जाते हैं। केवल ट्रॉली की गति देखें और फर्श व हवा छोड़ दें तो ऊर्जा का कुछ हिसाब छूट जाएगा। यहाँ सभी संख्यात्मक उदाहरण सरल शिक्षण उदाहरण हैं।
स्रोत: एनसीईआरटी एक्सप्लोरेशन: कार्य, ऊर्जा और सरल मशीनें ↗ · एनसीईआरटी भौतिकी: गति के नियम ↗
अभ्यास करें
ट्रॉली का पूरा प्रश्न हल करें
- 4 किलोग्राम ट्रॉली पर आगे 14 न्यूटन और पीछे 6 न्यूटन प्रतिरोध है। दिशा सहित परिणामी बल और त्वरण निकालें।
- वह विराम से शुरू होकर यही त्वरण 3 सेकंड बनाए रखती है। अंतिम चाल और फिर गतिज ऊर्जा निकालें।
- तर्क जाँचें: परिणामी बल = 8 न्यूटन आगे; त्वरण = 2 मीटर/सेकंड²; अंतिम चाल = 6 मीटर/सेकंड; गतिज ऊर्जा = ½ × 4 × 36 = 72 जूल। समझाएँ कि 14 न्यूटन को परिणामी बल मानना गलत क्यों है।
अपनी समझ जाँचें
क्या दूरी धनात्मक और विस्थापन शून्य हो सकता है?
हाँ। बाहर जाकर शुरुआती जगह लौटने पर रास्ते की लंबाई धनात्मक है, लेकिन स्थिति का कुल बदलाव शून्य है।
क्या शून्य परिणामी बल हमेशा विराम बताता है?
नहीं। ऐसे संदर्भ में जो त्वरण या घूर्णन नहीं कर रहा (जड़त्वीय संदर्भ), इसका अर्थ वेग का न बदलना है। वस्तु स्थिर या स्थिर वेग से गतिमान हो सकती है।
एक वस्तु पर क्रिया-प्रतिक्रिया रद्द क्यों नहीं होती?
दोनों बल अलग वस्तुओं पर लगते हैं। जिस वस्तु का अध्ययन कर रहे हैं, उसी पर लगने वाले बल उसका परिणामी बल देते हैं।
3 किलोग्राम वस्तु 2 मीटर/सेकंड से चलती है। गतिज ऊर्जा कितनी है?
½ × 3 × 2² = 6 जूल। पहले चाल का वर्ग करें; द्रव्यमान समान रहे तो चाल दुगुनी करने से गतिज ऊर्जा चार गुनी होगी।
