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विज्ञान

पारितंत्र: खाद्य जाल, ऊर्जा प्रवाह और पोषक चक्र

तालाब या बगीचा जीवों, पानी, हवा और मिट्टी के संबंधों से चलता है। सीखें कि भोजन कैसे बनता है, ऊर्जा कैसे पहुँचती है, पदार्थ कैसे चक्र में लौटते हैं और खाद्य जाल में बदलाव कैसे फैलते हैं।

PLS फाउंडेशन द्वारा · · 6 मिनट पढ़ाई, और अभ्यास

इस पाठ के अंत तक: खाद्य जाल समझाएँ, ऊर्जा प्रवाह और पोषक चक्र का अंतर बताएँ तथा आवास बदलने के संभावित प्रभाव समझें।

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मुख्य विचार

पारितंत्र में जीव और उनका भौतिक पर्यावरण परस्पर क्रिया करते हैं। उत्पादक ऊर्जा ग्रहण करते हैं, उपभोक्ता दूसरे जीवों से भोजन लेते हैं और अपघटक पोषक तत्त्वों को चक्र में लौटाते हैं। ऊर्जा तंत्र से होकर बहती है; पदार्थ चक्रों में फिर उपयोग हो सकते हैं।

1. जीव, समष्टि, समुदाय और पारितंत्र

एक मेंढक एक जीव है। एक तालाब में उसी प्रजाति के मेंढक उसकी समष्टि बनाते हैं। पौधों, कीटों, मछलियों, कवकों और अन्य जीवों की अलग समष्टियाँ मिलकर जैव समुदाय बनाती हैं। पानी, प्रकाश, घुली गैसें, तापमान, खनिज और उनके परस्पर संबंध जोड़ें तो पारितंत्र का अध्ययन होता है। इन स्तरों से अलग सवाल पूछ सकते हैं: एक मेंढक का व्यवहार, मेंढकों की संख्या या पूरे तालाब पर छाया का प्रभाव।

जीवित घटक जैविक और भौतिक-रासायनिक परिस्थितियाँ अजैविक कहलाती हैं। दोनों महत्वपूर्ण हैं। उपयुक्त जीवों वाला तालाब भी पानी की दशा बदलने पर अनुपयुक्त बन सकता है। अध्ययन की सीमाएँ बंद दीवारें नहीं: बारिश का पानी आता है, कीट उड़कर पहुँचते हैं और आसपास के पत्ते गिरते हैं। मनुष्य का सँभाला बगीचा भी पारितंत्र है, जिसे सिंचाई, कटाई और रोपण प्रभावित करते हैं।

स्रोत: एनआईओएस पर्यावरण विज्ञान: पारितंत्र ↗ · एनसीईआरटी विज्ञान: हमारा पर्यावरण ↗

2. उत्पादक भोजन बनाते हैं, ऊर्जा पैदा नहीं करते

हरे पौधे प्रकाश संश्लेषण में प्रकाश ऊर्जा की मदद से कार्बन डाइऑक्साइड और पानी से भोजन बनाते हैं तथा ऑक्सीजन छोड़ते हैं। इसलिए उन्हें उत्पादक कहते हैं: उनका बनाया जैविक भोजन खाद्य जाल का बड़ा आधार है। “उत्पादक” का अर्थ शून्य से ऊर्जा बनाना नहीं; प्रकाश ऊर्जा भोजन में संचित रासायनिक ऊर्जा बनती है। पौधों को खनिज पोषक तत्त्व भी चाहिए। मिट्टी ये देती है, लेकिन पौधों द्वारा बनाई शर्करा का मुख्य स्रोत नहीं है।

पौधे भी जंतुओं की तरह भोजन से उपयोगी ऊर्जा पाने के लिए कोशिकीय श्वसन करते हैं। इसलिए प्रकाश संश्लेषण और श्वसन अलग प्रक्रियाएँ हैं। पेड़ केवल ऑक्सीजन बनाने वाली वस्तु नहीं; वह बढ़ता, श्वसन करता, पानी का आदान-प्रदान करता और अन्य जीवन को सहारा देता है। इससे समझ आता है कि विविध परिपक्व आवास की जगह कुछ पौधे लगा देना तुरंत समान पारिस्थितिक परिणाम नहीं देता।

स्रोत: एनसीईआरटी विज्ञान: हमारा पर्यावरण ↗ · एनसीईआरटी क्यूरियोसिटी: प्रकृति की संपदा ↗

3. खाद्य शृंखला के तीरों का अर्थ समझें

एक सरल शिक्षण शृंखला लें: घास → टिड्डा → मेंढक → साँप। तीर भोजन से उस जीव की ओर है जिसे उससे ऊर्जा मिलती है। घास उत्पादक, टिड्डा प्राथमिक उपभोक्ता, मेंढक द्वितीयक उपभोक्ता और इस शृंखला में साँप अगले पोषण स्तर पर है। इन्हें पोषण स्तर कहते हैं। वे संबंध बताते हैं; हर परिस्थिति में हर प्रजाति का स्थायी पद नहीं।

वास्तविक संबंध खाद्य जाल बनाते हैं, क्योंकि जीवों के भोजन-संबंध कई होते हैं। पक्षी बीज और कीट दोनों खा सकता है; ऊर्जा एक से अधिक रास्तों से मिलती है। किसी कीट की संख्या घटे तो पक्षी भोजन बदल सकता है, दूसरी जगह जा सकता है या विकल्प न होने पर कठिनाई झेल सकता है। दिशा सीखने में शृंखला उपयोगी है; कई संबंध साथ समझने में जाल अधिक उपयोगी है।

खाद्य ऊर्जा का रास्ता

  1. घासउत्पादक
  2. टिड्डाप्राथमिक उपभोक्ता
  3. मेंढकद्वितीयक उपभोक्ता
  4. साँपअगला उपभोक्ता
तीर भोजन से ऊर्जा पाने वाले जीव की ओर हैं। यह सरल शिक्षण शृंखला है; वास्तविक खाद्य जाल में कई जुड़े रास्ते होते हैं।

स्रोत: एनसीईआरटी विज्ञान: हमारा पर्यावरण ↗ · एनआईओएस पर्यावरण विज्ञान: पारितंत्र ↗

4. ऊपर के पोषण स्तर पर कम ऊर्जा क्यों मिलती है?

जीव को मिली ऊर्जा का बड़ा भाग चलने, शरीर सँभालने, वृद्धि की प्रक्रियाओं और अन्य जीवन कार्यों में लगता है। कुछ ऊर्जा ऊष्मा बनकर पहुँचती है; कुछ पदार्थ खाया या पचाया नहीं जाता। केवल एक हिस्सा अगले उपभोक्ता के लिए उपलब्ध जैवभार बनता है। इसलिए अगले पोषण स्तरों तक कम ऊर्जा पहुँचती है। ऊर्जा नष्ट नहीं हुई; पूरे हिसाब में शृंखला के बाहर के स्थानांतरण भी जोड़ने होते हैं।

जानबूझकर सरल किए उदाहरण में उत्पादकों में 1,000 ऊर्जा इकाइयाँ हों और हर चरण में 10% स्थानांतरण मानें। प्राथमिक उपभोक्ताओं को 100, द्वितीयक को 10 और अगले स्तर को 1 इकाई मिलेगी। हर बार 0.10 से गुणा करें, दस इकाई न घटाएँ। वास्तविक दक्षता बदलती है; उदाहरण दिखाता है कि सीमित ऊर्जा से हर अगले स्तर पर बराबर ऊर्जा माँग पूरी नहीं हो सकती।

स्रोत: एनसीईआरटी विज्ञान: हमारा पर्यावरण ↗

5. अपघटक जीवन को पदार्थ चक्रों से जोड़ते हैं

सूखे पत्तों और मृत अवशेषों में पदार्थ व रासायनिक ऊर्जा मौजूद रहती है। अनेक कवक और जीवाणु जैसे अपघटक जैविक पदार्थ तोड़ते हैं और पोषक तत्त्वों को ऐसे रूप में लौटाते हैं जो मिट्टी, पानी और जीवों में फिर प्रवेश कर सकें। मृत पदार्थ खाने या छोटे भागों में बाँटने वाले जीव भी मदद करते हैं। नमी, तापमान और ऑक्सीजन अपघटन प्रभावित करते हैं; सूखा पत्ता और नम पत्तों का ढेर समान गति से नहीं टूटते।

मुख्य अंतर यह है कि पदार्थ चक्र में लौट सकते हैं, जबकि ऊर्जा बहती है और ऊष्मा के रूप में स्थानांतरण के साथ जैविक कार्य के लिए कम उपलब्ध होती जाती है। किसी पोषक तत्त्व का परमाणु पौधे, फिर जंतु में जाकर अपघटन से लौट सकता है। अधिकांश ऐसे तंत्रों को सूर्य से नई ऊर्जा मिलती है। अपघटक पोषक तत्त्व लौटाते हैं; सारी मूल उपयोगी ऊर्जा सूर्य या उत्पादक को वापस नहीं भेजते।

स्रोत: एनआईओएस पर्यावरण विज्ञान: पारितंत्र ↗

6. उदाहरण: स्कूल के बगीचे में एक बदलाव

मान लें स्कूल सारे गिरे पत्ते हटाकर विविध पौधों की जगह एक ही प्रकार की छोटी कटी घास लगा देता है। मैदान साफ़ दिख सकता है, लेकिन भोजन और आश्रय के प्रकार कम हो सकते हैं। पत्ते हटाने से अपघटकों और कुछ छोटे जीवों का उपयोगी पदार्थ भी हटता है। ये जाँचने योग्य प्रक्रियाएँ हैं, हर जीव के घटने का प्रमाण नहीं। परिणाम मौजूद प्रजातियों, बचे आवास और देखभाल के तरीके पर निर्भर होगा।

बेहतर सवाल है “भोजन और आश्रय के कौन से संबंध बदले?”, केवल “जगह हरी दिखती है?” नहीं। पौधों के प्रकार, छाया, बचे पत्तों के हिस्से और सुरक्षित रास्तों से बार-बार किए अवलोकन मिलाएँ। आवास में बदलाव ज़िम्मेदार कर्मचारियों की सहमति से करें। इससे हर अनदेखे कोने को सुरक्षित या हर सँवारे क्षेत्र को जीवनहीन माने बिना समझ को निर्णय से जोड़ सकते हैं।

स्रोत: एनसीईआरटी क्यूरियोसिटी: जीव जगत में विविधता ↗ · एनसीईआरटी क्यूरियोसिटी: प्रकृति की संपदा ↗

7. गिनती के साथ नमूना लेने का तरीका चाहिए

आज चार और कल दो तितलियाँ दिखना समष्टि आधी होने का पर्याप्त प्रमाण नहीं। मौसम, समय, देखने की अवधि और स्थान बदलना गिनती प्रभावित कर सकते हैं। समान क्षेत्र में तुलनीय समय पर उतनी ही देर देखें, कई बार जाएँ और अज्ञात प्रजातियों को पक्की पहचान से अलग रखें। निष्कर्ष माप के अनुरूप हो: “इन दौरों में कम दिखीं” कहना “आधी तितलियाँ मर गईं” से बहुत अलग है।

स्रोत: एनसीईआरटी क्यूरियोसिटी: जीव जगत में विविधता ↗

अभ्यास करें

खाद्य जाल का मॉडल बनाएँ और समझाएँ

  1. घास → टिड्डा → मेंढक → साँप बनाएँ। बीज खाने वाला और कीट खाने वाला पक्षी जोड़ें; तीर भोजन से खाने वाले की ओर हो। उत्पादक व उपभोक्ता लिखें। यह शिक्षण मॉडल है, किसी खास बगीचे का रिकॉर्ड नहीं।
  2. कीटों की संख्या घटने के दो संभावित प्रभाव समझाएँ। हर शिकारी की समान प्रतिक्रिया मानने के बजाय भोजन का वैकल्पिक रास्ता भी जोड़ें।
  3. मृत पौधों-जंतुओं से अपघटन और पौधों तक लौटते पोषक तत्त्व जोड़ें। समझाएँ कि यह पदार्थ चक्र क्यों है और निरंतर ऊर्जा की ज़रूरत इसकी वजह से समाप्त क्यों नहीं होती।

अपनी समझ जाँचें

क्या मिट्टी हरे पौधे का मुख्य भोजन है?

नहीं। हरा पौधा कार्बन डाइऑक्साइड, पानी और प्रकाश से प्रकाश संश्लेषण द्वारा शर्करा बनाता है। मिट्टी पानी, खनिज और सहारा देती है; यह बनाई गई शर्करा देने से अलग भूमिका है।

घास से टिड्डे तक तीर क्या बताता है?

यह खाद्य ऊर्जा के स्थानांतरण की दिशा दिखाता है: टिड्डा घास से भोजन पाता है। यह पीछा करने की दिशा नहीं है।

बीज और कीट दोनों खाने वाला जीव क्या एक ही निश्चित पोषण स्तर पर होगा?

नहीं। स्थिति भोजन के रास्ते पर निर्भर है। उत्पादक और दूसरे उपभोक्ता को खाने पर उन शृंखलाओं में स्तर अलग होंगे।

सरल 10% मॉडल में उत्पादकों की 500 इकाइयों के बाद कितना होगा?

अगले स्तर पर 50 और उसके अगले पर 5 इकाई। यह मानी हुई स्थानांतरण दर की गणना है, हर पारितंत्र का वास्तविक माप नहीं।

सारी उपयोगी ऊर्जा वापस न लाने पर भी अपघटक आवश्यक क्यों हैं?

वे मृत जैविक पदार्थ से पोषक तत्त्व निकालने में मदद करते हैं ताकि पदार्थ फिर काम आएँ। ऊर्जा और पदार्थ का हिसाब अलग है: पोषक तत्त्व चक्र में लौटते हैं, जबकि उपयोगी ऊर्जा की नई आपूर्ति चाहिए।

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