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मानविकी और दर्शन

तर्कशास्त्र, तर्क और तर्कदोष

तर्क केवल झगड़े का दूसरा नाम नहीं। वह किसी निष्कर्ष के समर्थन में दिए कारणों की व्यवस्था है। यह पाठ सामान्य वाक्यों से शुरू होता है; बीजगणित या दर्शन का पूर्व ज्ञान आवश्यक नहीं। आप कारण और निष्कर्ष का संबंध जाँचेंगे तथा भारतीय न्याय परंपरा का योगदान समझेंगे।

PLS फाउंडेशन द्वारा · · 6 मिनट पढ़ाई, और अभ्यास

इस पाठ के अंत तक: तर्क का ढाँचा बनाएँ, शर्त वाला दावा जाँचें, निगमन और आगमन अलग करें तथा वक्ता पर हमला किए बिना गलत तर्क सुधारें।

यह विषय सीधे पढ़ें, या शृंखला अपनाएँ: दर्शन: प्रश्न, तर्क और अच्छा जीवन

मुख्य विचार

आधारवाक्यों और उनसे निकाले निष्कर्ष, दोनों को जाँचें। वैध निगमन में आधारवाक्य सही और निष्कर्ष गलत एक साथ नहीं हो सकते। युक्तिसंगत निगमन वैध होता है और उसके आधारवाक्य भी सही होते हैं। आगमन निष्कर्ष को कुछ मजबूती देता है, उसकी गारंटी नहीं।

वाक्य के भीतर का ढाँचा पहचानें

“कमरे में शोर है, इसलिए अध्ययन मंडल दूसरी जगह जाए” में एक स्पष्ट आधारवाक्य और निष्कर्ष है। कुछ मान्यताएँ अनकही हैं: शोर नियोजित पढ़ाई में बाधा है और दूसरी उपयुक्त जगह उपलब्ध है। इन्हें स्पष्ट करने से सुझाव जाँचना आसान होता है। क्योंकि और इसलिए जैसे शब्द संकेत हैं, गारंटी नहीं। “बादलों से पानी गिरने के कारण वर्षा हुई” स्वीकृत घटना की व्याख्या हो सकती है; वर्षा होने का प्रमाण देने वाला तर्क होना आवश्यक नहीं। पूछें कि वक्ता क्या मनवाना चाहता है और कौन-से कथन उसका समर्थन करते हैं। आधारवाक्य को भी समर्थन चाहिए हो सकता है। लंबे संदेश को क्रमांकित आधारवाक्यों और एक निष्कर्ष में लिखने से छूटी कड़ी दिखती है। वक्ता का आशय बनाए रखें; कमजोर दावा गढ़कर उसे हराना असली तर्क की जाँच नहीं।

स्रोत: इग्नू: तर्कशास्त्र का परिचय ↗ · इग्नू: तर्कदोष ↗

वैधता संबंध की और सत्यता कथनों की जाँच है

मानें: डिब्बे A की सभी वस्तुएँ पुस्तकें हैं; यह वस्तु डिब्बे A में है; इसलिए यह पुस्तक है। दोनों आधारवाक्य सही हों, तो निष्कर्ष सही होना ही चाहिए। ढाँचा वैध है। यदि डिब्बे में पेन भी है, पहला आधारवाक्य गलत है; तर्क वैध रहते हुए भी युक्तिसंगत नहीं होगा। दूसरी ओर अवैध तर्क संयोग से सही निष्कर्ष दे सकता है। “सभी आम फल हैं; यह अमरूद फल है; इसलिए यह आम है” समावेशन की दिशा उलट देता है। प्रतिमॉडल गलती दिखाता है: अमरूद फल समूह में है, आम समूह में नहीं। केवल पसंदीदा निष्कर्ष देखकर वैधता न तय करें। आधारवाक्यों को सही मानकर पूछें कि क्या निष्कर्ष फिर भी गलत हो सकता है। ऐसी एक सुसंगत स्थिति अवैधता दिखाने के लिए पर्याप्त है।

स्रोत: इग्नू: तर्कशास्त्र का परिचय ↗

हल सहित उदाहरण: खुला पुस्तकालय

विश्वसनीय नियम मानें: “यदि पुस्तकालय खुला है, तो प्रवेश द्वार की बत्ती जल रही है।” खुला पुस्तकालय देखकर बत्ती जलने का निष्कर्ष निकलता है। बत्ती बंद देखकर पुस्तकालय बंद होने का निष्कर्ष निकाल सकते हैं, यदि उस स्थिति में नियम का अपवाद नहीं। लेकिन बत्ती जलना पुस्तकालय खुले होने का प्रमाण नहीं; सफ़ाई के बाद बत्ती जलती रह सकती है। इस गलती को फल की पुष्टि का तर्कदोष कहते हैं। इसी तरह बंद पुस्तकालय से बत्ती बंद होना नहीं निकलता। ढाँचा है: यदि P, तो Q। P सही हो तो Q सही होगा; Q गलत हो तो P गलत होगा। केवल Q सही होने से P सही होना सिद्ध नहीं होता। वास्तविक जीवन में नियम की विश्वसनीयता भी जाँचें: बिजली जाने पर केवल “आमतौर पर सही” नियम लागू नहीं होगा। सही तार्किक ढाँचा गलत आधारवाक्य को ठीक नहीं करता।

अनुमान की दिशा जाँचें

मान लें: खुला है तो बत्ती जलती हैक्या निष्कर्ष निकाल सकते हैं?
पुस्तकालय खुला है।हाँ: बत्ती जल रही है।
बत्ती बंद है।हाँ: पुस्तकालय खुला नहीं है।
बत्ती जल रही है।नहीं: सफ़ाईकर्मी ने जलती छोड़ी हो सकती है।
पुस्तकालय बंद है।नहीं: बत्ती तब भी जल सकती है।
इन निष्कर्षों में माना गया है कि नियम इस स्थिति में बिना अपवाद सत्य है। वैध तर्क-रूप स्वयं नियम की सटीकता सिद्ध नहीं करता।

स्रोत: इग्नू: तर्कदोष ↗

न्याय: अनुमान की कड़ी स्पष्ट करें

न्याय में अनुमान की प्रसिद्ध प्रस्तुति के पाँच अवयव हैं: प्रतिज्ञा, हेतु, सामान्य संबंध का उदाहरण, उस संबंध का मामले पर प्रयोग और निष्कर्ष। पारंपरिक धुएँ-अग्नि उदाहरण में पहाड़ पर धुआँ होने से अग्नि का दावा किया जाता है। रसोई जैसे परिचित उदाहरण से संबंध बताया, पहाड़ पर लागू किया और निष्कर्ष निकाला जाता है। महत्त्व केवल पाँच वाक्य दोहराने का नहीं। जाँचना है कि हेतु उस मामले में सचमुच है और साबित की जाने वाली बात से आवश्यक संबंध रखता है। कोहरे को धुआँ समझना पहली शर्त को बिगाड़ता है। कभी-कभार साथ दिखने को अनिवार्य संबंध मानना दूसरी शर्त को बिगाड़ता है। यह एक भारतीय परंपरा का आरंभिक परिचय है, यह दावा नहीं कि सभी भारतीय दर्शनों के नियम समान थे या एक उदाहरण से सार्वभौमिक नियम सिद्ध हो जाता है।

स्रोत: इग्नू: अनुमान ↗ · इग्नू: न्याय दर्शन, इकाई 5 ↗

हल सहित उदाहरण: सर्वेक्षण से बहुत बड़ा निष्कर्ष

युवा मंडल शाम के कोडिंग सत्र में आने वाले बारह सदस्यों से पूछता है कि शाम सुविधाजनक है या नहीं। दस हाँ कहते हैं। आयोजक निष्कर्ष देता है कि मोहल्ले के लगभग सभी युवाओं के लिए शाम सुविधाजनक है। निष्कर्ष नमूने से बहुत आगे जाता है: जो आ ही नहीं सके, उनसे पूछा नहीं गया। समस्या चयन में है; इससे दस उत्तर गलत नहीं हो जाते। अलग काम के समय, यात्रा और ज़िम्मेदारियों वाले लोगों को शामिल करने तथा चयन की विधि दर्ज करने से आगमन मजबूत होगा। अच्छा नमूना भी सावधानी वाला अनुमान देता है, निगमन जैसी निश्चितता नहीं। अब मानें कि मुफ़्त चाय शुरू होने के बाद उपस्थिति बढ़ी। चाय कारण हो सकती है, लेकिन छुट्टी या नया शिक्षक भी कारण हो सकता है। क्रम और सहसंबंध परिकल्पना सुझाते हैं; कारण घोषित करने से पहले तुलना चाहिए।

स्रोत: इग्नू: तर्कशास्त्र का परिचय ↗ · इग्नू: तर्कदोष ↗

गलती समझाएँ, फिर सुधारें

किसी तर्क को तर्कदोष कहना शुरुआत है, व्याख्या का विकल्प नहीं। कोई ग्रामीण उच्चारण के कारण प्रस्ताव खारिज करे, तो बताएँ कि उच्चारण से प्रस्ताव की उपयोगिता तय नहीं होती। “या सभी फ़ोन बंद हों या कोई कुछ नहीं सीखेगा” में बीच के विकल्प दिखाएँ: सीमित समय, चुनिंदा काम या परीक्षण अवधि। “मुफ़्त शिक्षा” का अर्थ पहले बिना शुल्क और बाद में बिना ज़िम्मेदारी किया जाए, तो अर्थ बदल गया। ये अलग गलतियाँ हैं और इनके सुधार भी अलग होंगे। एक और गलती से बचें: किसी दावे का खराब तर्क उस दावे को स्वयं गलत सिद्ध नहीं करता। अप्रासंगिक आलोचना की जगह प्रमाण दें, झूठे द्वंद्व के विकल्प बढ़ाएँ और अस्पष्ट शब्द स्पष्ट करें। तर्कशास्त्र तब उपयोगी है जब हम उचित व्याख्या की जाँच करते हैं, केवल विरोधी को शर्मिंदा करने वाले नाम नहीं जुटाते।

स्रोत: इग्नू: तर्कदोष ↗

अभ्यास करें

अभ्यास: छात्रवृत्ति वाले तर्क को सुधारें

  1. कल्पित नियम लें: छात्रवृत्ति S पाने वाले हर विद्यार्थी ने फ़ॉर्म जमा किया है। नीला ने फ़ॉर्म जमा किया है। नीचे प्रस्तावित निष्कर्ष लिखें: “नीला को S मिलती है।”
  2. ऐसा संभव मामला बनाएँ जिसमें दोनों आधारवाक्य सही हों लेकिन निष्कर्ष गलत हो। पात्रता की शर्त या सीमित स्थान कल्पित कर सकते हैं; इसे वास्तविक योजना न बताएँ।
  3. “नीला को S मिलती है” से शुरू करके एक वैध निष्कर्ष लिखें। फ़ॉर्म जमा होने के प्रमाण और छात्रवृत्ति मिलने के प्रमाण में अंतर करें।
  4. समाधान का तर्क: फ़ॉर्म जमा करना आवश्यक हो सकता है, पर्याप्त नहीं। नीला फ़ॉर्म देकर भी दूसरी शर्त पूरी न करे। यदि उसे S मिलती है, तो नियम से फ़ॉर्म जमा होना निकलता है। मूल अवैध तर्क का निष्कर्ष संयोग से सही हो सकता है, पर तर्क उसे सिद्ध नहीं करता।

अपनी समझ जाँचें

क्या वैध तर्क में गलत आधारवाक्य हो सकता है?

हाँ। वैधता संबंध की विशेषता है। युक्तिसंगत निगमन के लिए सभी आधारवाक्य सही भी होने चाहिए; ढाँचे की जाँच तथ्यों की जाँच का विकल्प नहीं।

जलती बत्ती से पुस्तकालय खुला क्यों सिद्ध नहीं होता?

नियम कहता है कि खुलने पर बत्ती जलेगी, यह नहीं कि केवल खुले पुस्तकालय में बत्ती जल सकती है। दूसरे कारण से जलती बत्ती प्रतिमॉडल देती है।

केवल शाम में आने वालों से पूछने में क्या समस्या है?

उनकी उपलब्धता ने ही नमूने में उनका चयन किया। न आ सकने वाले अनुपस्थित हैं, इसलिए नमूना बड़े समूह का पर्याप्त प्रतिनिधित्व नहीं करता।

क्या न्याय का अनुमान दावा दोहराने से चलता है?

नहीं। हेतु मामले में होना चाहिए और अनुमानित गुण से उचित संबंध रखना चाहिए। दोहराव गायब संबंध सिद्ध नहीं करता, न गलत निरीक्षण सुधारता है।

क्या वक्ता की आलोचना हमेशा अप्रासंगिक है?

नहीं। कथन जाँचते समय संबंधित विशेषज्ञता या हितों का टकराव महत्त्वपूर्ण हो सकता है। लेकिन रूप या उच्चारण से स्वतंत्र प्रमाण या तर्क का ढाँचा खंडित नहीं होता।

तर्कदोष मिलने से क्या निष्कर्ष निकलता है?

दिए समर्थन में एक निश्चित दोष है। दूसरे कारणों से निष्कर्ष सही हो सकता है; दावे पर जीत घोषित करने के बजाय उन कारणों को अलग जाँचें।

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