पूर्णिमा लल्लन शर्मा फाउंडेशन · स्थापना 2021
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निःशुल्क अध्ययन शृंखला

हिन्दू परंपराओं का अध्ययन शुरू करें

धर्म और कर्म सीखें, शास्त्रों की शिक्षाएँ जानें तथा दर्शन और योग समझें।

3 पाठ · शुरुआती स्तर · अपनी गति से सीखें

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कर्नाटक के हम्पी में हेमकूट पहाड़ी का पत्थर का मंडप और विरूपाक्ष मंदिर का दृश्य।
हम्पी, कर्नाटक · Ingo Mehling · CC BY-SA 4.0

सीखें, अभ्यास करें, समझाएँ

व्याख्या पढ़ने से पहले अभ्यास आजमाएँ। अपनी समझ जाँचने वाले प्रश्नों के उत्तर अपने शब्दों में दें, फिर दिए उत्तर से अपने तर्क की तुलना करें। आगे बढ़ने से पहले कठिन हिस्सा फिर पढ़ें। खाते या भुगतान की जरूरत नहीं है।

  1. 01

    हिंदू धर्म की बुनियाद: धर्म, कर्म, मोक्ष और रोजमर्रा का जीवन

    सही कर्म किसे कहें? शरीर बदलने पर भी क्या बना रहता है? अच्छा जीवन किसे कहते हैं? हिंदू परंपराएँ इन प्रश्नों को उपासना, पारिवारिक जिम्मेदारी, अध्ययन और सेवा से जोड़ती हैं। इस पाठ में पहले मूल विचार समझेंगे; अगले पाठों में ग्रंथों और दर्शन की ओर बढ़ेंगे।

    सीखने का लक्ष्य: छह मूल शब्द समझाएँ, जीवन के चार पुरुषार्थों में अंतर बताएँ, भक्ति के प्रमुख रूप पहचानें और किसी सामान्य निर्णय में धर्म तथा जिम्मेदार कर्म का उपयोग करें।

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  2. 02

    वेद, उपनिषद, रामायण और गीता: उनकी प्रमुख शिक्षाएँ

    हिंदू धर्मग्रंथ स्तुति, संवाद, गहन जिज्ञासा और पूजनीय व्यक्तियों के जीवन से शिक्षा देते हैं। यहाँ पहले प्रमुख ग्रंथ-परंपराओं का संबंध समझेंगे, फिर इसी पृष्ठ पर आत्मज्ञान, कर्तव्य, भक्ति और दान की शिक्षाएँ सीखेंगे।

    सीखने का लक्ष्य: प्रमुख ग्रंथ-परिवार पहचानें और उद्दालक के नमक के उदाहरण, नचिकेता के चुनाव, भरत के दायित्व तथा गीता की तीन व्यावहारिक शिक्षाओं को समझाएँ।

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  3. 03

    हिंदू दर्शन और योग: षड्दर्शन और साधना के मार्ग

    हिंदू दर्शन पूछता है कि सत्य क्या है, हम उसे कैसे जानते हैं और मनुष्य मुक्त कैसे होता है। योग अनुशासित जीवन और चित्त की साधना की ओर ले जाता है। इस पाठ में प्रमुख दर्शन, वेदांत के मतभेद तथा कर्मयोग और ध्यान जैसे परिचित शब्दों के पीछे की साधना समझेंगे।

    सीखने का लक्ष्य: षड्दर्शन और वेदांत के तीन प्रमुख मतों में अंतर बताएँ, योग के आठों अंग समझाएँ और कर्म, ज्ञान तथा भक्ति को किसी व्यावहारिक जिम्मेदारी से जोड़ें।

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